हास्य व्यंग्य

सरकार के खिलाफ आंदोलन 

एक दिन मेरे मित्र भाई भरोसे लाल सुबह सुबह ही मेरे घर आ धमके और बोले कि सरकार के विरुद्ध आंदोलन करने की रूपरेखा यानि  योजना बनाने के लिए एक मीटिंग करनी है, तो आपसे यह पूछना था कि आप मेरे मित्र हैं, तो आप तो उसमें रहेंगे ही और  पर आप इस मीटिंग के लिए और किस-किस को यानी कितने आदमी और लाएंगे ,यह भी बता दो तो अच्छा रहे। तो स्वाभाविक मैंने पूछा कि पहले यह तो बताओ कि आंदोलन किस बात के लिए करना। तो उन्होंने बड़े आश्चर्य से मेरी ओर देखा और मुझे ताना मारने लगे कि आप हो तो सरकार के भक्त  ही । वे अभी कुछ और कहते ,इस लिए मैंने पहले ही कह दिया, हाँ, हूँ ।इस में  क्या आपत्ति है और  इसीलिए ही तो पूछ रहा पूछ रहा हूँ  कि आप को  आंदोलन किस बात का करना है । वे बोले कि भला आप को गरीब गुरबा का दुख नहीं दिखाई दे रहा , उसका जीना मुश्किल हो रहा है, उसको दो समय की रोटी भी ठीक से नहीं मिल रही है, उनका जीवन नर्क बना हुआ है ।

 पर वे अभी और भी बोलते  या यूं कहूं कि उनके पेट में बहुत गैस बन रही थी जिसे निकालने के लिए उन्हें सुबह से कोई और नही मिला था।  इस लिए अपनी भाषण देने की बीमारी के कारण अभी और भी बोलना चाहते थे, परंतु मैंने उन्हें बीच में ही ब्रेक लगा क्र  रोक दिया और उनके गरीब गुरबा के लिए दिए जा रहे भाषण पर विराम लगा दिया।  उनको इस बात से बहुत क्रोध आया। पर वह करते भी क्या ? क्योंकि एक तो यह मेरा ही घर था  जहां वे मुझे समझा  रहे थे और दूसरा उनके सामने आलू के बढ़िया-बढ़िया पराठे के ऊपर मक्खन और साथ में दही भी था तथा चाय बन  रही थी जो बस सामने आने ही वाली थी। पर चाय से पहले उस मे डाली गई इलायची की खुशबू पहले ही आने लगी थी। एक तो इसलिए उन्होंने अपने क्रोध पर थोड़ा काबू किया। फिर दूसरी बात यह थी कि वे मुझे दूसरी पार्टी का समर्थक होने के कारण  अपना प्यारा सा  दुश्मन भी मानते थे ।पर हमेशा कहते  मित्र ही थे ।इसलिए भी वह थोड़ा चुप रहे और तीसरी बात यह  थी कि  यह कोई सड़क या सरकारी दफ्तर नहीं था ,जहां उन्हें चुप करवाते ही वे जिंदाबाद मुर्दाबाद या इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाने लगते। 

इसीलिए मैंने उनके भाषण को रोककर बिना उन्हें छूट दिए ही या  उन्हें पूछे बिना ही  अपनी बात कहनी शुरू कर दी । मैंने उन्हें पूछा भाई आप गरीब किसको कह रहे हो। अपने आपको या किसी और को , परंतु आपकी तो पांच सौ गज की भव्य यानि आलीशान  कोठी है। आपके पास दो कार हैं तथा और भी बहुत सी सुविधाएं तथा धन दौलत  है। फिर आप कौन से गरीबों के लिए सूखते जा रहे हो। वैसे आपकी तो तौंद भी हर साल आप की सम्पति की ही तरह बढ़ती जाती  है ।आप जैसे जैसे आंदोलन करते हो वैसे वैसे आपकी तौंद भी बढ़ती है तथा आपकी संपत्ति भी उसी हिसाब से बढ़ जाती है। 

और सुनो भाई आप गरीब किसे कह रहे हो, जिन्हें सरकार से हर महीने दो रुपये किलो का गेहूं मिलता है और पता है मुझे क्या भाव मिलता है पर  आपको पता है शायद नहीं हो।  आप को यह भी  नहीं पता होगा कि गेहूं क्या भाव है।क्योंकि आप तो शायद खरीदते ही नहीं हो और केवल गेहूं ही नहीं तेल चावल चीनी सब मुझे उन से बीस गुना  दाम पर मिलता है। साथ ही और भी सुनो जिसे आप गरीब कह रहे हो उनके लिए सरकार घर बनवा कर दे रही है और शौचालय बनवा रही है और इतना ही नहीं उन्हें कितने ही प्रकार की दूसरी सहायता व सुविधाएं  सरकार दे रही है। उनके यहां बच्चा पैदा हो तो पैदा होते ही  पैसा मिलता है ।  स्कूल जाने पर किताब , वर्दी ,जूता और  खाना सब कुछ  मुफ्त में मिलता है और लड़की की शादी हो तो उस के लिए भी   पैसा मिलता है, बूढ़ों के लिए  हर महीने नगद सहायता राशि बिना कुछ किए ही। पर आपकी नजरों में वे गरीब हैं और पता है, यह गरीब लोग ही राशन की दुकानों पर से राशन  लेकर दूसरी दुकानों पर बेचकर दूसरी चीजें खरीद लाते हैं और रोज शाम को लालपरी के ढक्कन भी इन्हीं के यहां खुलते हैं और हमारे यहां तो कभी कभार कोई ठंडा पेय आना भी मुश्किल हो जाता है। इतना ही  इन्हीं के लिए रोज-रोज नई-नई सुविधाएं भी सरकार बनाती ही रहती है। इसीलिए की  गरीब हैं यह लोग ।और साथ ही बिजली मुफ्त पानी मुफ्त  सब कुछ मुफ्त है इन के लिए।

 और भाई आपको यह भी पता है क्या कि मेरा हर महीने टैक्स अपने आप कट जाता है। शायद आपको यह पता भी न हो। क्योंकि आप तो कभी टैक्स भरते ही नहीं होंगे। पर आप भी गरीब हैं और आपके सहयोगी या संगी साथी भी गरीब हैं ।भाई अभी आपको आंदोलन करने का ही शौक है तो कभी इस बात पर भी करो कि टैक्स देने वालों को भी सुविधाएं मिले और जिन्हें आप मुफ्त सुविधाएं दे रही हो उनसे कुछ भी काम तो करवाओ, चाहे प्लास्टिक ही चुनवा लो ,कोई काम तो करवाओ। आप तो उन्हें आलसी मुफ्तखोर और निकम्मे बनाने पर तुले हुए हो और गरीब बने रहने को मजबूर करने पर आमादा हो। 

 भाई आपको आंदोलन से भले ही फायदा हो जाए । बेशक चुनाव जीत जाएं या कुछ बन जाए पर आप देश का कितना नुकसान कर रहे हैं, यह भी आपको पता है क्या ?आप राष्ट्र का कितना नुकसान कर रहे हैं यह भी कभी आपने सोचा है भाई। आज मेरी प्रार्थना पर इस बात पर भी सोचना घर में जाकर आराम से। फिर किस बात के लिए आंदोलन करना है ,इस पर विचार करना। 

— डॉ, वेद व्यथित 

डॉ. वेद व्यथित

ख्यात नाम : डॉ. वेद व्यथित नाम : वेद प्रकाश शर्मा जन्म तिथि : अप्रैल 9,1956 शिक्षा : एम्० ए० (हिंदी ),पी एच ० डी० शोध का विषय "नागार्जुन के साहित्य में राजनीतिक चेतना मेरठ विश्व विद्यालय मेरठ वर्तमान पता : अनुकम्पा -1577 सेक्टर -3 ,फरीदाबाद -121004 फोन नम्बर : 0129-2302834 , 09868842688 ईमेल : dr.vedvyathit@gmail.com Blog : http://sahiytasrajakved.blogspot.com सम्प्रति : अध्यक्ष - भारतीय साहित्यकार संघ (पंजी ) संयोजक - सामाजिक न्याय मंच (पंजी) उपाध्यक्ष - हम कलम साहित्यिक संस्था (पंजी ) शोध सहायक - अंतर्राष्ट्रीय पुनर्जन्म एवं मृत्योपरांत जीवन शोध केंद्र इंदौर ,भारत परामर्श दाता - समवेत सुमन ग्रन्थ माला सलाहकार - हिमालय और हिंदुस्तान विशेष प्रतिनिधि - कल्पान्त सम्पादकीय परामर्श - ब्रह्म चेतना सम्पादकीय सलाहकार - लोक पुकार साप्ताहिक पत्र संस्थापक सदस्य - अखिल भारतीय साहित्य परिषद ,हरियाणा प्रान्त पूर्व सम्पादक - चरू (साहित्यिक पत्र ) पूर्व प्रांतीय सन्गठन मंत्री - अखिल भारतीय साहित्य परिषद परामर्श दाता : www.mohantimes .com (इ पत्रिका ) जापानी हिंदी कवि सम्मेलनों में सहभागिता अनुवाद : जापानी,रुसी ,फ्रेंच , नेपाली तथा पंजाबी भाषा में रचनाओं का अनुवाद हो चुका है प्रकाशन : मधुरिमा (काव्य नाटक ) १९८४ आखिर वह क्या करे (उपन्यास )१९९६ बीत गये वे पल (संस्मरण )२००२ आधुनिक हिंदी साहित्य में नागार्जुन (आलोचना )२००७ भारत में जातीय साम्प्रदायिकता (उपन्यास )२००८ अंतर्मन (काव्य संकलन )२००९ न्याय याचना (खंड काव्य ) 2011 साहित्य पर शोध : 'बीत गए वो पल' संस्मरण में सामाजिक चेतना कुरुक्षेत्र विश्व विद्यालय कुरुक्षेत्र 'आखिर वह क्या करे ' उपन्यास में अन्तर्द्वन्द की अवधारणा विनायक मिशन्स विश्व विद्यालय तमिल नाडू 'भारत में जातीय साम्प्रदायिकता ' उपन्यास में सामाजिक बोध krukshetr विश्व विद्यालय 'मधुरिमा' काव्य नाटक पर शोध कुरुक्षेत्र विश्व विद्यालय नवीन सर्जन : * "व्यक्ति चित्र " नामक नवीं विधा का सर्जन किया है * "त्रि पदी" काव्य की नई विधा का सर्जन किया है अन्य *कुरुक्षेत्र विश्व विद्यालय में आयोजित एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में अंतिम सत्र की अध्यक्षता * शताधिक साहित्यिक समारोह व गोष्ठियों की अध्यक्षता की है अंर्तजाल (Internet) पर प्रकाशित विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशन : www.pravasiduniya.com www.sahityashilpi.com www.p4poetry.com http://sakhikabira.blogspot.com http://aakhrkalsh.blogspot.com http://blog4varta.blogspot.com http://utsahi.blogspot.com www.chrchamnch.com www.janokti.com www.srijangatha.com www.khabarindya.com etc. सम्मान : साहित्य सर्जन के लिए "समाज गौरव "सम्मान भारतीय साहित्यकार संसद द्वारा "मोहन राकेश शिखिर सम्मान पत्रकार विश्व बन्धु सम्मान युवा कार्यक्रम एनम खेल मंत्रालय भारत सरकार द्वारा सम्मान हिमालय और हिंदुस्तान एवार्ड हरियाणा सरकार द्वारा आपात काल के विरुद्ध किये संघर्ष के लिए ताम्र पत्र से सम्मानित विभिन्न विधाओं में निरंतर लेखन....