कविता

राष्ट्र भाषा

राष्ट्र भाषा वही, जिसको विश्व जानता है,
जन जन स्वयं को, गौरवान्वित मानता है।
वैज्ञानिक आधार, संस्कार संस्कृति संवाहक,
हिन्दी से ही विश्व, भारत को पहचानता है।

संविधान में राष्ट्र भाषा, राजनीतिक खेल है,
जनता में स्वीकार्यता, संस्कार संरक्षण मेल है।
लोक भाषा लोक संस्कृति, हिन्दी में रचे बसे,
वैश्विक पटल पर, हिन्दी की चाह अनमोल है।

— अ कीर्तिवर्द्धन