गीत/नवगीत

जन सेवा के दीप जलाएं

राम जी के आदर्श संजोएं।

कर्म करें और खुशियाँ बोएं।

सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह,

ब्रह्मचर्य को साध के सोएं।

नहीं किसी का दिल है दुखाना।

महनत कर है खाना खाना।

नहीं किसी के जाल में फसना,

नहीं किसी को है ठुकराना।

रूठे हुओ को हमें मनाना।

प्रेम से दिल के दीप जलाना।

अपने अपने गान छोड़कर,

समूह गान हम सबको गाना।

प्रतीकों से है आगे बढ़ना।

नहीं किसी पर दोष है मढ़ना।

छल, कपट, नफरत को तज,

निष्ठा, विश्वास की सीढ़ी चढ़ना।

नहीं किसी को विजित है करना।

नहीं किसी का मान है हरना।

हार-जीत से आगे बढ़कर,

सबका दिल खुशियों का झरना।

राम के केवल गीत न गाएं।

आदर्शों को हम अपनाएं।

नाम छोड़कर दीपावली पर,

जन सेवा के दीप जलाएं।

डॉ. संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी

जवाहर नवोदय विद्यालय, मुरादाबाद , में प्राचार्य के रूप में कार्यरत। दस पुस्तकें प्रकाशित। rashtrapremi.com, www.rashtrapremi.in मेरी ई-बुक चिंता छोड़ो-सुख से नाता जोड़ो शिक्षक बनें-जग गढ़ें(करियर केन्द्रित मार्गदर्शिका) आधुनिक संदर्भ में(निबन्ध संग्रह) पापा, मैं तुम्हारे पास आऊंगा प्रेरणा से पराजिता तक(कहानी संग्रह) सफ़लता का राज़ समय की एजेंसी दोहा सहस्रावली(1111 दोहे) बता देंगे जमाने को(काव्य संग्रह) मौत से जिजीविषा तक(काव्य संग्रह) समर्पण(काव्य संग्रह)