कविता

पतंग !

पतंग !
यानि, ज़िन्दगी का
पूरा फ़लसफ़ा.
हवा के परों पर
पूरा जीवन.
ज़िन्दगी का हर रंग
रंगीन उम्मीदें ,
रंगीन उतार-चढ़ाव,
जीवन का संतुलन,
हवा के ख़िलाफ़
संघर्ष और ऊँचाई,
सही और ग़लत
दिशा की तमीज़,
जीवन का विस्तार,
अनंत ऊँचाई तक पहुँचने
के सपने और ख़ुशी.
यही कुछ तो है
ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा.
संक्रांति शब्द में लगाव है,
जुड़ाव है
यह शीत और बसंत
की सन्धि है,आकाश और धरती का मिलन है,
लोक और शास्त्र का समन्वय है
तन का स्नान
धन का दान
मन की उड़ान और
सूर्य की स्वर्णिम किरणों से सुख और स्वास्थ्य प्राप्त करने का पर्व है
मकर संक्रांति
प्रकृति से जुड़े इस पर्व की परम्पराएं ऋतु अनुकूल और आरोग्यदायक हैं

— मदन

*मदन मोहन सक्सेना

जीबन परिचय : नाम: मदन मोहन सक्सेना पिता का नाम: श्री अम्बिका प्रसाद सक्सेना जन्म स्थान: शाहजहांपुर .उत्तर प्रदेश। शिक्षा: बिज्ञान स्नातक . उपाधि सिविल अभियांत्रिकी . बर्तमान पद: सरकारी अधिकारी केंद्र सरकार। देश की प्रमुख और बिभाग की बिभिन्न पत्रिकाओं में मेरी ग़ज़ल,गीत लेख प्रकाशित होते रहें हैं।बर्तमान में मैं केंद्र सरकार में एक सरकारी अधिकारी हूँ प्रकाशित पुस्तक: १. शब्द सम्बाद २. कबिता अनबरत १ ३. काब्य गाथा प्रकाशधीन पुस्तक: मेरी प्रचलित गज़लें मेरी ब्लॉग की सूचि निम्न्बत है: http://madan-saxena.blogspot.in/ http://mmsaxena.blogspot.in/ http://madanmohansaxena.blogspot.in/ http://www.hindisahitya.org/category/poet-madan-mohan-saxena/ http://madansbarc.jagranjunction.com/wp-admin/?c=1 http://www.catchmypost.com/Manage-my-own-blog.html मेरा इ मेल पता: madansbrac@gmail.com ,madansbarc@ymail.com