राजनीति

भारत और अमेरिका के मध्य हुआ ऐतिहासिक समझौता, झूमा बाजार 

भारत और अमेरिका के मध्य अप्रैल  2025 से प्रारंभ हुआ टैरिफ वॉर अब समझौते के साथ समापन की ओर अग्रसर हो रहा है।अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से भारत पर टैरिफ घटाने के ऐलान के साथ ही शेयर बाजार में उछल आया और निवेशकों के चेहरे खिल उठे। डॉलर के मुकाबले रुपए में भी मजबूती दिखी। 

यूरोपियन यूनियन के 27 सदस्य देशों के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौते के बाद सेअनुमान लगाया जा रहा था कि अमेरिका दबाव में आ गया है और उसे भारत की व्यापार चिंताओं के सम्मान करना ही पड़ेगा  और अंतत: ऐसा हुआ भी।अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प  ने सोशल मीडिया पर  कहा कि  यह मेरे लिए सम्मान की बात है कि प्रधानमंत्री मोदी ने हमसे बात की । वह मेरे सबसे अच्छे दोस्तों में से एक हैं और अपने देश के शक्तिशाली नेता हैं। हमने एक नहीं कई मुद्दों पर बात की जिसमें व्यापर और  रूस -यूक्रेन युद्ध को समाप्त करना भी शामिल था। मोदी के लिए दोस्ती और उनके सम्मान के चलते और उनकी मांग पर तत्काल प्रभाव से हम अमेरिका और भारत के बीच एक व्यापार समझौते पर  सहमत हुए हैं, जिसमें अमेरिका भारत पर लगाए गए  टैरिफ को 25 से घटाकर 18 प्रतिशत कर रहा है। भारत  के साथ हमारा अद्भुत संबंध आगे और मजबूत होगा।  जैसे ही सोशल मीडिया पर अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान आया वैसे ही भारत में भी हलचल तीव्र हो गई। एन डी ए संसदीय दल की बैठक में अमेरिका के साथ हो रहे समझौते पर प्रधानंमत्री मोदी ने कहा कि हमने बहुत समय तक धैर्य रखा जिसका परिणाम हम सभी के सामने है । अमेरिका की ओर से की गई इस घोषणा से दुनिया के दो  सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच  व्यापारिक तनाव को कम करने में  सहायता मिलेगी। 

भारत सर्वाधिक लाभ में- भारत और  अमेरिका के बीच जो व्यापार समझौता  हुआ है उसका सर्वाधिक लाभ  भारत को ही मिलने जा रहा है। ट्रंप की भारत को लेकर की गए इस बड़ी  टैरिफ घोषणा के बाद भारत अब इस मामले में पडोसी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले से अधिक लाभ मे आ गया है । चीन और पाकिस्तान की तुलना में भी भारत पर अब कम टैरिफ है। इंडोनेशिया,  बांग्लादेश और वियतनाम भारत से अधिक टैरिफ वाले देश बन चुके हैं। वर्तमान समय में बांग्लादेश और वियतनाम पर 20, मलेशिया, कंबोडिया, थाईलैंड और पाकिस्तान पर 19 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ लगा हुआ है । समाचार यह भी है कि अब  भारत भी अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ और गैर टैरिफ बाधाओं  को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है । कहा जा रहा है कि इसे संभावित रूप से शून्य तक ले जाया जा सकता है। यह भारत की वर्तमान व्यापार नीति में बाजार पहुंच के सबसे बड़े बदलावो में से एक है। जैसे ही भारत अमेरिकी उत्पादों के लिए अपने बाजार खोलेगा कई अमेरिकी वस्तुएं भारतीय उपभोक्ताओं के लिए काफी सस्ती हो जाएंगी। 

भारतीय बाजार में लैपटॉप, गैजेट्स और  अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की कीमतें कम हो सकती हैं ।घरेलू  उपकरणों की पहुंच आसान हो जाएगी।निर्यात के मोर्चे पर भी भारत को बहुत लाभ होने जा रहा है।अमेरिका से टैरिफ कम हो जाने के बाद हमारे टैक्स्टाइल, आभूषण और रत्न निर्यात पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इन सेक्टर्स के अलावा भारत का  चमड़ा और  फुटवियर उद्योग  अमेरिका को हर वर्ष  1.18 अरब,  केमिकल उद्योग 2.34 अरब और इलेंक्टिक और मशीनरी उद्योग 9 अरब डॉलर का निर्यात करता है। 

विश्लेषकों  का अनुमान है कि भारत और अमेरिका के मध्य द्विपक्षीय व्यापार अगले कुछ वर्षों  में 500 अरब डॉलर की ओर 5 गुना गति से बढ़ेगा ओैर नए व्यापार समझौते से भारी आर्थिक लाभ प्राप्त होंगे।अमेरिका के साथ डील फाइनल हो जाने के कारण अब एक नई सप्लाई चेन मिल गई है जिसका लाभ  भी भारत को मिलेगा। 

भारत -अमेरिका व्यापार समझौते के बाद भारत की जीडीपी वृद्धि बढ़कर 6.9 प्रतिशत हो सकती है। टैरिफ कटौती से भारत की आर्थिक वृद्धि निवेश, वातावरण और वाह्य संतुलन को समर्थन मिलेगा। गोल्डमैन एक्स का मानना है कि अगर यह टैरिफ लागू रहता है तो इससे भारत की अर्थव्यवस्था को व्यापक लाभ होगा। अब ट्रेड पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता कम हो जाएगी । उद्योग जगत इसे भरोसा बढ़ाने वाला कदम मान रहा है ओैर एफआईआई  की वापसी से बाजारों में सकारात्मक वातावरण बनने की संभावना बताई जा रही है। 

भारत और अमेरिका के मध्य हुआ  समझौता इंगित करता  है कि अब पूरी दुनिया भारत में  व्यापार के माध्यम से निवेश के नए अवसर खोज रही है।यह समझौता न सिर्फ भारत की विकास आकांक्षाओं को गति देगा बल्कि देश को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और नवाचार का केंद्र  बनाने के लक्ष्य को भी मजबूती देगा।भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत विकास पथ पर है और यह डील विकास को अतिरिक्त गति देगी।यह कदम भारत -अमेरिका आर्थिक संबंधों में भरोसा बढ़ाने वाला है और विकसित भारत – 2047 के विजन के अनुरूप दिख रहा है। इस समझौते के लागू हो जाने के बाद अब निवेश और  रोजगार के नए अवसर भी सामने आयेंगे। 

— मृत्युंजय दीक्षित

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