इतिहास

जनता के जनरल त्रि-सेवा प्रमुख बिपिन रावतजी

भारतीय सशस्‍त्र सेनाओं के पेशेवर त्रि-सेवा प्रमुख और भारत सरकार के वरिष्ठतम वर्दीधारी सैन्य सलाहकार बिपिन रावतजी  आज के समयानुसार [ यूनिटों का आपसी सामन्जस्य और नेतृत्व की गुणवत्ता ] एक असाधारण वीर योद्धा थे।उनका एक शानदार सैनिक किर्तिमान था। जैसा आप सभी जानते ही हैं कि प्रत्येक अधिकारी और सैनिक जब सैन्य सेवा में प्रवेश करता है तो शपथ लेता है कि वह ”कानून के जरिये स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्चा विश्वास और निष्ठा रखता है”।  जिसके चलते वर्दी में हम सब भाई हो जाते हैं तब हमारी हैसियत, समुदाय, धन और पृष्ठभूमि का कोई अर्थ नहीं राह जाता है। यहाँ  हम एक बड़े परिवार की तरह रहते हैं , एक-दूसरे की सफलताओं का जश्न मनाते हैं  और दु:ख के क्षणों को साँझा भी करते रहते हैं । अब जहाँ तक त्रि-सेवा प्रमुख बिपिन रावतजी की बात है तो वे  सेना के ऐसे पहले सर्वश्रेष्ठ अधिकारी थे जिन्होंने देश के बाहरी ही नहीं बल्कि आन्तरिक दुश्मनों को खुलकर ललकारते थे और उनके देशद्रोही करतूतों को भी कठोरता के साथ कुचलने की पैरवी करते थे जो उनके द्वारा समय समय पर दिये गये वक्तव्यों से स्पष्ट परिलक्षित होता है । उदाहरण के तौर पर

 उनके द्वारा समय समय पर दिये गये वक्तव्यों में से निम्न तीन प्रमुख वचन आप सभी के ध्याननार्थ यहाँ प्रस्तुत है –
1]  2017 में काश्मीर के पत्थरबाजी पर उन्होंने कहा था – वे हमारी फौज पर सिर्फ पत्थर क्यों फेकते हैं।अगर वे हथियारों का प्रयोग करते तो ‘ज्यादा खुशी होती’ जिससे हम उन्हें जैसा चाहे जबाब दे सकते थे।
2] 2018 – चीन को अन्तर्राष्ट्रीय मञ्चऔर सैन्य मामलों में मजबूत माना जाता है तो भारत भी कमजोर नहीं है।आज 1962 जैसे हालात नहीं हैं क्योंकि आज भारत की सैन्य ताकत बहुत मजबूत है।
3] 2021- ‘एक नये प्रकार की युद्ध नीति आकार लेने लगी है यानी जैविक युद्धनीति। हमें इसके लिये तैयार रहना होगा। स्वयं को मजबूत करना होगा ताकि हमारा देश इससे फैलायी जा सकने वाली बीमारियों व वायरस की चपेट से बच सके।’
सबसे बड़ी बात यह है कि त्रि-सेवा प्रमुख बिपिन रावतजी  पाकिस्तान और चीन को सबक सिखाने के लिए युद्धक नीतियाँ  मजबूत कर रहे थे। त्रि-सेवा प्रमुख बिपिन रावतजी चीन और पाकिस्तान के खिलाफ मुँहतोड़ जवाब भी दे रहे थे। कश्मीर में उन्होंने आतंकवादियों को कठोरता के साथ कुचलने की नीति अपनायी थी और सेना को पूरी छूट दे रखी थी।और इन सबको ही ध्यान रख प्रधानमन्त्रीजी  ने ०८ दिसम्बर २०२१ को तमिलनाडु के कुन्नूर में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उनके निधन पश्चात, उन्हें श्रद्धाञ्जली देते हुए लिखा था ‘जनरल बिपिन रावतजी एक उत्कृष्ट सैनिक थे। एक सच्चे देशभक्त के रूप में उन्होंने सशस्त्र बलों और समस्त सुरक्षा व्यवस्था के आधुनिकीकरण में बहूमूल्य योगदान दिया। सामरिक मामलों में उनकी दूरद्दष्टि असाधारण थी।’
उन्होंने हथियार दलालों और सेना की आपूर्ति लाइन में रिश्तवखोरी पर अँकुश लगाने में सफलता प्राप्त कर ली थी । नरेन्द्र मोदीजी  की सरकार में हथियार दलालों की एक नहीं चल रही थी और हथियार दलालों की करोड़ों-अरबों कमाने के सपने टूट रहे थे। सेना के लिए जरूरी सामानों की आपूर्ति में चल रही रिश्वतखेारी भी रूकी थी। नरेन्द्र मोदीजी  की सरकार और उन्होंने हथियार दलालों और सेना की आपूर्ति लाइन में रिश्तवखोरी पर जिस तरह का अंकुश लगा पाने में सफल हुये थे उसके चलते  आपूर्ति दलाल भी उनसे नाराज थे।यह नाराजी उनकी शहादत के बाद सोशल मीडिया पर भी कुछ देशद्रोही दिखा भी गए। लेकिन जिस बड़ी तादाद में जनता ने इनके प्रति, अन्तिम यात्रा के दौरान अपना आदर प्रदर्शित किया उससे यह तो स्वतः सिद्ध हो गया कि ये जनता के जनरल थे । 
अब मैं इस बहादुर देशभक्त और महान सैनिक त्रि-सेवा प्रमुख बिपिन रावतजी को उनकी १६ मार्च पर पड़ने वाली २०२वीं जन्म-जयन्ती पर श्रद्धापूर्वक शत्-शत् नमन् करता हूँ। 

— गोवर्द्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’ 

गोवर्धन दास बिन्नानी 'राजा बाबू'

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