बाल कविता : बारिश में सफर
बारिश में पापा संग,
निकला नन्हा लाल।
बूँदें बरसीं झमाझम,
मौसम हुआ कमाल॥
खिड़की से बाहर दिखे,
पेड़ न्यारे-न्यारे।
बादल नभ में घूमते,
लगते कितने प्यारे॥
शीशे पर बूँदें पड़ीं,
करतीं टप-टप गान।
देख-देखकर खुश हुआ,
नन्हा प्यारा जान॥
सड़क किनारे जल भरा,
चमकी बूंदों धार।
बारिश में यह सफर भी,
बड़ा सुहावन यार॥
पापा संग जब सफर हो,
खुशियों का संसार।
बारिश वाली राह भी,
लगती खूब बहार।।
— डॉ. सत्यवान सौरभ
