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व्यंग्य – देवासुर संग्राम

इस देश में कोई कितना ही बड़ा आतताई हो,मानवता का नृशंस हत्यारा हो,मानव देह में साक्षात राक्षस ही क्यों न हो;उसके चाहने वाले ,घावों पर मरहम लगाने वाले और राजनीति की आड़ में अपना उल्लू सीधा करने वाले अवश्य मिल जाएँगे।इससे यही स्पष्ट होता है कि आदमी आदमी की लाशों पर राजनीति कर रहा है।जिस देश में आतंक के बल पर कारागार में पड़े हुए क्रूरकर्मा कैदी विधायक और सांसद चुन लिए जाएँ,वहाँ की जनता को कौन – सी उचित संज्ञा और विशेषणों से अलंकृत किया जाए; समझ से परे है।

जिस देश को हम विश्वगुरु से सम्मानित करते हुए नहीं अघाते;ऐसा लगता है जैसे कोई कंस,दुर्योधन या रावण स्वयं अपनी पीठ आप ही थपथपा रहा हो।आखिर विश्वगुरु के क्या मानक हैं?क्या लूट खसोट और जनता पर अत्याचार करना ही विश्वगुरु की परिभाषा है?जिस देश में आतताइयों के समर्थक नेता मातमपुर्सी के बहाने काजू पिस्ता आदि मेवा की दावतें उड़ा रहे हों,क्या ऐसे लोग सत्ता के ऊँचे सिंहासन के अधिकारी होने के सुपात्र हो सकते हैं?

सही बात को भी सही कह पाने का समर्थन न करना नेताओं की ओछी मानसिकता को दर्शाता है।वह दिन देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य होगा ,जिस दिन ऐसे क्रूर जन जन नायक बनने का दम्भ भरते हुए सत्तासीन होंगे।विपक्ष का अर्थ यह कदापि नहीं होता कि राष्ट्र कल्याण की योजनाओं को भी जन विरोधी कहा जाए ! राष्ट्र भक्त होना कोई सामान्य बात नहीं है।प्रत्येक नेता राष्ट्र भक्ति का तमगा गले में लटकाए घूमता है,किन्तु क्या उसे राष्ट्र भक्ति के अर्थ भी पता हैं? राष्ट्र भक्ति की आड़ में कितने भेड़िये और रंगासियार कारों के रेवड़ में अपने पीछे भेड़ों को हूटराइज़ कर रहे हैं।आओ! आओ!!चले आओ!!! हमारे पीछे चले आओ।हम ही तुम्हारे उद्धारक हैं। और चमचे और गुर्गे हैं कि मोटी -मोटी मालाओं से उनका भाव बढ़ा रहे हैं।सिक्कों से तोलकर यह जतला रहे हैं कि देखो यही है सब कुछ,इसी के लिए हम जीते- मरते हैं,दिन -रात एक करते हैं।हम किसी छापे और कानून से नहीं डरते हैं।पाँच साल के बाद यों ही विचरते हैं। हमें देखो और हमारे जैसे हो जाओ। हमें न किसी जेल का डर है ,न किसी नेता का। हम स्वच्छन्द भ्रमण करते हैं।

सपेरे ही साँपों से खेल सकते हैं,उन्हें पाल सकते हैं।साँपों को कितना ही दूध पिला लिया जाए ,किंतु अवसर पाते ही वे अपने पालक को भी डंसने से नहीं बख्शते।यहाँ न सपेरों की कमी है और न साँपों की।अब यह भी जगज़ाहिर हो चुका है कि सपेरा कौन है और साँप कौन हैं?सब कुछ जानते हुए भी सपेरे साँपों को दूध पिलाने में तल्लीन हैं।यह इस देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है।कब महाकाल भगवान का त्रिशूल चल पड़ेगा कि न साँप रहेंगे और न सपेरे ही बच पाएँगे।कब पाप घट
लबालब हो जाएगा तभी तो कोई चमत्कार होगा और सब देखते रह जाएंगे।

‘यथा राजा तथा प्रजा’ की कहावत प्रसिद्ध है।किंतु ‘यथा पंक तथा महापंक’ होना किस बात का द्योतक है।सत्य यह भी है कि
पानी में पानी मिले, मिले पंक में पंक।
जैसे में तैसो मिले, मिले जहर में डंक।।
यह भारत भूमि बड़ी ही समृद्ध है। यहाँ किसी भी वस्तु की कोई कमी नहीं है।जहाँ देव हैं वहीं राक्षस भी हैं। जिनका कार्य ही चलते पथिकों के पथ में काँटे बोना है।पर हाथी तो इसे अनदेखा करते हुए आगे बढ़ते हुए चले ही जा रहे हैं। देवासुर संग्राम पहले कभी हुआ हो अथवा नहीं ,किन्तु इस समय अपनी भयंकर स्थिति में है। लगता है यह महायुद्ध कभी समाप्त नहीं होता ,पहले देव -दानवों के बीच हुआ था तो आज देशभक्त और सत्ताबुभुक्षु नेताओं के बीच छिड़ा हुआ है। यह भी स्पष्ट ही है कि विजयश्री देशभक्तों का ही वरण करेंगीं और निश्चित रूप से करेंगीं।

— डॉ. भगवत स्वरूप ‘शुभम्’

*डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम'

पिता: श्री मोहर सिंह माँ: श्रीमती द्रोपदी देवी जन्मतिथि: 14 जुलाई 1952 कर्तित्व: श्रीलोकचरित मानस (व्यंग्य काव्य), बोलते आंसू (खंड काव्य), स्वाभायिनी (गजल संग्रह), नागार्जुन के उपन्यासों में आंचलिक तत्व (शोध संग्रह), ताजमहल (खंड काव्य), गजल (मनोवैज्ञानिक उपन्यास), सारी तो सारी गई (हास्य व्यंग्य काव्य), रसराज (गजल संग्रह), फिर बहे आंसू (खंड काव्य), तपस्वी बुद्ध (महाकाव्य) सम्मान/पुरुस्कार व अलंकरण: 'कादम्बिनी' में आयोजित समस्या-पूर्ति प्रतियोगिता में प्रथम पुरुस्कार (1999), सहस्राब्दी विश्व हिंदी सम्मलेन, नयी दिल्ली में 'राष्ट्रीय हिंदी सेवी सहस्राब्दी साम्मन' से अलंकृत (14 - 23 सितंबर 2000) , जैमिनी अकादमी पानीपत (हरियाणा) द्वारा पद्मश्री 'डॉ लक्ष्मीनारायण दुबे स्मृति साम्मन' से विभूषित (04 सितम्बर 2001) , यूनाइटेड राइटर्स एसोसिएशन, चेन्नई द्वारा ' यू. डब्ल्यू ए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड' से सम्मानित (2003) जीवनी- प्रकाशन: कवि, लेखक तथा शिक्षाविद के रूप में देश-विदेश की डायरेक्ट्रीज में जीवनी प्रकाशित : - 1.2.Asia Pacific –Who’s Who (3,4), 3.4. Asian /American Who’s Who(Vol.2,3), 5.Biography Today (Vol.2), 6. Eminent Personalities of India, 7. Contemporary Who’s Who: 2002/2003. Published by The American Biographical Research Institute 5126, Bur Oak Circle, Raleigh North Carolina, U.S.A., 8. Reference India (Vol.1) , 9. Indo Asian Who’s Who(Vol.2), 10. Reference Asia (Vol.1), 11. Biography International (Vol.6). फैलोशिप: 1. Fellow of United Writers Association of India, Chennai ( FUWAI) 2. Fellow of International Biographical Research Foundation, Nagpur (FIBR) सम्प्रति: प्राचार्य (से. नि.), राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सिरसागंज (फ़िरोज़ाबाद). कवि, कथाकार, लेखक व विचारक मोबाइल: 9568481040

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