गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

न घबरा कि हर बात का हल रहा है
परेशानियों का समय चल रहा है

भरोसा रखो कर्म करते हुए तुम
लगेगा मुकद्दर तुम्हें छल रहा है

अगर काटकर शैल रस्ता निकाला
बदन से अधिक प्यार का बल रहा है

कवच काँच का कर गया काम कितना
हवा चल रही है दिया जल रहा है

लगाकर गए जो पिता आम-जामुन
बड़े हो गए पेड़ श्रम फल रहा है

हमें भी लिए साथ अपने हमेशा
समय भी नए रूप में ढल रहा है

मिले जिंदगी जो गँवाता बता दो
कि हर एक पल कीमती पल रहा है

— केशव शरण

केशव शरण

वाराणसी 9415295137