गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सुनो आज मिरे दिल पर अधिकार करना।
उचित जो लगे तुम वही यार करना।।

ज़माना नहीं दे कभी साथ हमको।
कभी तुम नहीं देख एतबार करना।।

अड़ंगे लगाएँ सभी राह में ही।
सुनो तुम तो कोशिश हरिक बार करना।।

मिले आज कोई तुम्हें बेसहारा।
तभी संग उसकी के नदी पार करना।।

चलो जो मुहब्बत की राहों पे देखो।
सुनो रोज़ गुलशन को गुलज़ार करना।।

चलो आज ग़ज़ल तुम सबको सुनाओ।
सुरों को ज़रा आज धारदार करना।।

— रवि रश्मि ‘अनुभूति’

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