बाल कविता

हमें स्कूल लगता प्यारा

सुबह-सुबह सूरज मुस्काए ,आँगन में छाया उजियारा।
बस्ता लेकर चल पड़ते हम, हमें स्कूल लगता प्यारा।
ज्ञान की बातें, खेल निराले, मिलते मित्र अनेक।
पढ़-लिखकर हम आगे बढ़ते, सीखें पाते नेक।
गुरुजन हमको राह दिखाते, देते ज्ञान अपार।
श्रम , अनुशासन, सच्चाई से, जीवन हो साकार।
नया ज्ञान, विज्ञान सिखाता , प्रकृति करे मनमोहित।
गर्व – कथा इतिहास सुनाए , भूगोल करे आह्लादित ।
पेड़ लगाएँ, सदा बढ़ाएँ, धरती माँ का मान।
पानी की हर बूँद बचाएँ, स्वच्छता पर दें ध्यान।
सब बच्चों को मिले पढ़ाई, कोई रहे न दूर,
शिक्षा से ही सँवरे जीवन,स्वप्न फलें भरपूर।
स्वस्थ रहे तन – मन भी अपना, प्रतिदिन खेलें खेल।
खेल से ही बचपन खिलता है, बढ़े परस्पर मेल।
अच्छे बच्चे, अच्छे नागरिक, बनकर देश सजाएँ।
जन – मन का अज्ञान मिटाएँ, शिक्षा – ज्योति जगाएँ।

— गौरीशंकर वैश्य विनम्र

*गौरीशंकर वैश्य विनम्र

117 आदिलनगर, विकासनगर लखनऊ 226022 दूरभाष 09956087585

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