मेरी कविता में सद्गुरु की वाणी होती है
मेरी कविता में जनता की आवाज होती है,
मेरी कविता में नारी शक्ति की बात होती है,
मेरी कविता में जल ,जंगल ,भूमि की होते हैं,
मेरी कविता में संघर्ष की कहानी होती है।
मेरी कविता में मन की पीड़ा होती है,
मेरी कविता में संस्कारों की बात होती है,
मेरी कविता में रिश्तों की बात होती है,
मेरी कविता दुःख में तपता हीरा जैसी है।
मेरी कविता में हिमालय की बात होती है,
मेरी कविता में त्याग की कहानी होती है ,
मेरी कविता में सिन्दूर की बात होती है,
मेरी कविता में माॅं बाप की बात होती है।
मेरी कविता में सद्गुरु की वाणी होती है
मेरी कविता में गौ माता की बात होती है
मेरी कविता में गंगा मैय्या की बात होती है,
मेरी कविता में मानवता की बात होती है।
— कालिका प्रसाद सेमवाल
