कविता

बेटी का बाप हूँ

बेटी का बाप हूँ
हाँ, एक बेटी का बाप हूँ
और मुझे वंश की दुहाई न दो
न उद्धार की
न मुखाग्नि की
मैं कोई विशेष नहीं…

मुझे कोई डर नहीं कि मेरे राज्य पर
पड़ोसी राजा चढ़ाई कर देगा
मैं कोई राजा थोड़े ही हूँ
सिर्फ एक बेटी का बाप हूँ।

कौन कहता है कि
बेटा बुढ़ापे की लाठी होता है
अरे मैंने तो पाँच-पाँच बेटों के बाप को
सड़कों पर ठोकरें खाते देखा है
वृद्धाश्रमों में तिल-तिल मरते देखा है।

साहब, मैं बेटी का बाप हूँ
और नहीं डरता अब
क्योंकि बेटियाँ
बेटों से कम नहीं…!

— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

नाम - मुकेश कुमार ऋषि वर्मा एम.ए., आई.डी.जी. बाॅम्बे सहित अन्य 5 प्रमाणपत्रीय कोर्स पत्रकारिता- आर्यावर्त केसरी, एकलव्य मानव संदेश सदस्य- मीडिया फोरम आॅफ इंडिया सहित 4 अन्य सामाजिक संगठनों में सदस्य अभिनय- कई क्षेत्रीय फिल्मों व अलबमों में प्रकाशन- दो लघु काव्य पुस्तिकायें व देशभर में हजारों रचनायें प्रकाशित मुख्य आजीविका- कृषि, मजदूरी, कम्यूनिकेशन शाॅप पता- गाँव रिहावली, फतेहाबाद, आगरा-283111

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