गीतिका/ग़ज़ल

हमसफ़र

वे कल तक थे हमसफ़र
आज जुदा- जुदा हो गये

सुहानी सुबह, हंसी शाम
अब सब अनमने हो गये

रोज मिलते, साथ चलते
रुठे – रुठे सनम हो गये

दोष बस इतना सा हमारा
वादा किया, लेट हो गये

लेके हाथ में हाथ उनका
सड़कों के शहंशाह हो गये

बुझ न सकी प्यास प्यार की
वे समुन्दर का पानी हो गये

हम देते रहेंगे उम्रभर दुआएं
वे कितने दूर – पास हो गये

महज चले थे दो कदम साथ
कहने को हमसफ़र हो गये …

— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

नाम - मुकेश कुमार ऋषि वर्मा एम.ए., आई.डी.जी. बाॅम्बे सहित अन्य 5 प्रमाणपत्रीय कोर्स पत्रकारिता- आर्यावर्त केसरी, एकलव्य मानव संदेश सदस्य- मीडिया फोरम आॅफ इंडिया सहित 4 अन्य सामाजिक संगठनों में सदस्य अभिनय- कई क्षेत्रीय फिल्मों व अलबमों में प्रकाशन- दो लघु काव्य पुस्तिकायें व देशभर में हजारों रचनायें प्रकाशित मुख्य आजीविका- कृषि, मजदूरी, कम्यूनिकेशन शाॅप पता- गाँव रिहावली, फतेहाबाद, आगरा-283111