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कोरोना योद्धाओं के नाम पत्र

कोरोना योद्धाओं के नाम मेरा यह पत्र

आदरणीय कोरोना योद्धाओं
आपको मेरा सादर नमन

हमारा पूरा परिवार व राष्ट्र आप सभी के अदम्य साहस व लगन से कुशलता पूर्वक अपने को सुरक्षित एवं सहज़ महसूस कर रहा है। हम सब आपकी स्वास्थ्य की कामना के लिए निरंतर भगवान से प्रार्थना भी कर रहे हैं ताकि आप अपने इस संकल्प को सफलतापूर्वक मुकाम तक पंहुचा सकें।
मैं नूतन गर्ग दिल्ली से आज़ यह पत्र लिखते हुए काफी प्रसन्नता का अनुभव कर यही हूं क्योंकि इससे पहले मैंने कभी ऐसे विलक्षण प्रतिभा से सम्पन्न व्यक्तियों को पत्र नहीं लिखा है। आशा करती हूं कि पत्र पढ़कर आपमें उत्साह का संचार अवश्य होगा, यह मेरा मानना है, आप क्या समझते हैं यह आप पर निर्भर करता है।
कभी बचपन में दादी, मम्मी और किताबों में आप सब योद्धाओं की वीरता की कहानियां सुनीं थीं। आज़ अपनी आंखों से सब देख रही हूं। तब कहीं जाकर ज्ञात हुआ कि हमारी दुनिया में कुछ फरिश्ते भी होते हैं, जिन्हें ऊपर वाला सिर्फ दूसरों के उद्धार स्वरूप इस दुनियां में बनाकर भेजता है। जो अपनी और अपने परिवार की जान एक किनारे पर रख अपने कर्म में संलग्न रहते हैं इसलिए आपको मेरा बारंबार प्रणाम।
टेलीविजन और समाचार पत्र में जब देखती, सुनती हूं कि आप सब पर किन्ही अराजकतत्वों नें हमला किया है, तब मन के भीतर से आवाज़ आती है कि इस दुनियां में भगवान भी सुरक्षित नहीं हैं फिर हम क्या चीज़ हैं?
काश… मैं उनको समझा पाती कि क्या सही है और क्या ग़लत? फर्क महसूस करा पाती कि क्या अच्छा है और क्या बुरा? अपने-पराए में भेद भी सिखा पाती।
पर…. मैं विवश हूं, मेरे दोनों हाथ और पैर बंधे हैं, मुंह भी बंधा हुआ है एक अदृश्य शक्ति से। ऊपर ब्रहाण्ड में बैठी वह अदृश्य शक्ति सबके पाप-पुण्य का हिसाब अवश्य रख रही है। मेरा पूरा विश्वास है कि एक न‌ एक दिन वे सभी सज़ा के ग्रास अवश्य बनेंगे।
मेरा आप सभी से हाथ जोड़ सिर्फ यह अनुरोध है कि आप अपना कर्म नित्य-प्रतिदिन निभाते हुए अपने मार्ग पर अग्रसर रहें। आप देखेंगे कि सफलता एक न एक दिन हमारे कदम अवश्य चूंमेंगी और हम निश्चित ही इस वैश्विक महामारी से आप सभी के अथक प्रयत्नों के परिणामस्वरूप बाहर निकल आएंगे।
आशा स्वरूप शाय़द मेरा पत्र आप सभी के मनोबल को बढ़ा सके।
धन्यवाद

आपकी महत्त्वकांक्षी
श्रीमती नूतन गर्ग (दिल्ली)

*नूतन गर्ग

दिल्ली निवासी एक मध्यम वर्गीय परिवार से। शिक्षा एम ०ए ,बी०एड०: प्रथम श्रेणी में, लेखन का शौक