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साहित्यिक आयोजन

साहित्यिक आयोजन

हिमाचल प्रदेश के अंद्रेटा में मिन्नी कहानी /लघुकथा संगोष्ठी का आयोजन
अंद्रेटा: मिन्नी कहानी लेखक मंच (पंजी.) अमृतसर पंजाब और आदरा मिन्नी मैगज़ीन की तरफ से हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों में बसे कांगड़ा ज़िले के गांव अंद्रेटा में एक दिवसीय राष्ट्रीय लघुकथा संगोष्ठी का आयोजन किया। यह नाटककार नोरा रिचर्ड्स की समृद्ध विरासत की जगह है और पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला के अधीन है। इस संगोष्ठी में पंजाब के अलावा हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के लेखकों ने भी हिस्सा लिया। इस कार्यक्र्म के अध्यक्ष मंडल में केंद्रीय विशवविद्यालय, धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. चंद्रकांत सिंह, परसिद्ध कथाकार अशोक दर्द (बनीखेत, डलहौज़ी), परसिद्ध आलोचक डॉ. नायब सिंह मंडेर (हरियाणा), डॉ. हरप्रीत सिंह राणा (संपादक और आलोचक ) और जगदीश राय कुलरियां (मानद संपादक ‘मिन्नी मैगज़ीन’) शामिल थे। प्रोग्राम के पहले सेशन की शुरुआत डॉ. भवानी शंकर गर्ग ने मरहूम शायर सुरजीत पातर की ग़ज़ल ‘कुझ किहा तो हनेरा जरेगा किवें ..’ गाकर की और इस ऐतिहासिक जगह के बारे में जानकारी देते हुए मिसेज़ नोरा रिचर्ड्स और सरदार शोभा सिंह चित्तरकार के योगदान को याद किया। इसके बाद जगदीश राय कुलरियां ने इस समागम के मकसद और मिन्नी कहानी लेखक मंच की गतिविधिओं पर रोशनी डालते हुए कहा कि मंच का पंजाब और पंजाब से बाहर के इलाकों में जाकर समागम करने का मकसद मिन्नी कहानी विधा का प्रचार और प्रसार करना है, साथ ही दूसरे राज्यों में लिखी जा रही इस विधा के लेखकों से बातचीत और समझना भी है। मंच के नेता बीर इंदर बनभौरी ने कहा कि सांस्कृतिक और साहित्यक खुशहाली के लिए ऐसे प्रोग्राम बहुत ज़रूरी हैं। इसके बाद, अध्यक्ष मंडल ने ‘मिन्नी मैगज़ीन का नया अंक ’, डॉ. हरप्रीत सिंह राणा की आलोचनात्मक किताब ‘पंजाबी मिन्नी कहानी दा इतिहास’, डॉ. श्याम सुंदर दीप्ति का मिन्नी कहानी संग्रह ‘सत्रवां बसंत’, मंगत कुलजिंद का मिन्नी कहानी संग्रह ‘एम्बमिंग’, दर्शन सिंह बरेटा के मिन्नी कहानी संग्रह ‘रूह दियां तंदा ’ का दूसरा संस्करण , डॉ. नायब सिंह मंडेर के मिन्नी कहानी संग्रह ‘दिलां दी सांझ’ का दूसरा संस्करण और तृप्त भट्टी, दविंदर पटियालवी, हरदीप सभरवाल द्वारा सम्पादित पत्रिका ‘छिन’ का नया अंक लोकार्पण किया गया। आयोजन के दूसरे सत्र में लघुकथा वाचन से सत्र की शुरुआत हुई. कुलविंदर कौशल ने ‘मैं मुड आवंगा’ और ‘सीरियल किलर’, गुरमीत सिंह मराड़ ने ‘वेला आपो अपना’ और ‘कोई तो होवे’, कविता राजबंस ने ‘विरासत’ और ‘हवा दा बुल्ला’, जोगिंदर कौर अग्निहोत्री ने ‘तप’ और ‘कन्या दान’, दविंदर पटियालवी ने ‘असूलां दी जीत’ और ‘संस्कार’, कुलविंदर कुमार बहादुरगढ़ ने ‘आलने’ और ‘नाग’, परमजीत कौर शेखुपुर कलां ने ‘सिस्टम’ और ‘सच्चा प्यार’, महिंदर पाल बरेटा ने ‘बापू दे फूल’ और ‘एहो हमारा जीवूना’, शौकीन सिंह ने ‘अल्जाइमर’ और ‘खाली धरती का वारिस’, अशोक दर्द बनीखेत ने ‘हथियार’ और ‘राजनीति का गणित’, तरुणवीर सिंह ने ‘हाहा’ और ‘दीदार-ए-जिंदगी’, बीर इंदर बनभौरी ने ‘अधवाते बम्बल’ और ‘नायक’, राजिंदर रानी ने ‘रुखी मिस्सी’, विशाल वर्मा हिमाचल प्रदेश ने ‘एक झोका प्यार का’, जगदीश राय कुलरियां ने ‘जिंदगी’ और ‘टिकट’ तथा बलराज कुहाड़ा ने ‘हाक’ और ‘फसल बटेर’ प्रत्येक लेखक ने अपनी दो-दो लघुकथाओं का पाठ किया. प्रत्येक लेखक ने पढ़ी गई इन रचनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए, लेकिन अध्यक्ष मंडल के विशेषज्ञों ने विशेष रूप से इन पर चर्चा की। डॉ. नायब सिंह मंडेर ने कहा कि पढ़ी गई लघुकथाएं विषय और रूपक की दृष्टि से रोचक हैं। ये मिन्नी कहानियां, मिन्नी कहानी के वैधानिक ढांचे के अनुरूप हैं। उन्होंने लेखकों से इस शैली को गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ अपनाने की अपील की। ​​अशोक दर्द बनीखेत ने कहा कि ऐसे आयोजन लेखकों के लिए नए रास्ते खोलते हैं। उन्होंने कहा कि लघुकथा के विकास लिए ऐसे आयोजनों की जरूरत है। डॉ. हरप्रीत सिंह राणा ने मिन्नी कहानी के इतिहास के बारे में बात करते हुए कहा कि आजकल मिन्नी कहानी नई ऊंचाइयों को छू रही है और कई यूनिवर्सिटीज़ के पाठ्यक्रम का हिस्सा बन गई है। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटीज़ और दूसरे संस्थानों को इस विधा के विकास के लिए और प्रयास करने चाहिए। प्रो. चंद्रकांत सिंह ने सफल कार्यक्रम के लिए प्रबंधकों को बधाई दी और कहा कि साहित्य के क्षेत्र में लघुकथा विधा में बहुत संभानाएं है। यह विधा कम शब्दों में बड़ी बात करती है। उन्होंने कहा कि पढ़ी गई रचनाएँ विषय और शैली के मामले में मज़बूत थीं। उन्होंने कहा कि पंजाब में मिन्नी कहानी के विकास के लिए की जा रही कोशिशें तारीफ़ के काबिल हैं और वह अपने डिपार्टमेंट की तरफ से भी इस विधा के लिए कोशिशें करेंगे। कार्यक्रम का तीसरा सेशन ‘ओपन सेशन’ था, जिसमें मिन्नी कहानी लेखेको ने देर रात तक अपने रचन प्रकिर्या के बारे में बात की और सवालों के जवाब दिए। मंच ने अध्य्क्ष मंडल को सम्मानित किया और भागीदारों को सर्टिफिकेट दिए। महिंदरपाल बरेटा ने प्रोग्राम रिकॉर्ड किया, शौकीन सिंह, तरुणवीर सिंह और राजिंदर रानी ने फोटो खींचे। कोषाध्यक्ष कुलविंदर कौशल ने सभी का धन्यवाद किया। इस मौके पर प्रचार्य अंजना रानी, ​​किरणबाला संगरूर, शिखा गर्ग, वतनदीप, सोहित राय, आशा ठाकुर बनीखेत, उत्तम सिंह, परिका सिंगला, अजय शर्मा और राजभवन तथा डॉ शबनम ठाकुर व इंजीनियर राजेश ठाकुर भी मौजूद थे।
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*अशोक दर्द

जन्म –तिथि - 23- 04 – 1966 माता- श्रीमती रोशनी पिता --- श्री भगत राम पत्नी –श्रीमती आशा [गृहिणी ] संतान -- पुत्री डा. शबनम ठाकुर ,पुत्र इंजि. शुभम ठाकुर शिक्षा – शास्त्री , प्रभाकर ,जे बी टी ,एम ए [हिंदी ] बी एड भाषा ज्ञान --- हिंदी ,अंग्रेजी ,संस्कृत व्यवसाय – राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में हिंदी अध्यापक जन्म-स्थान-गावं घट्ट (टप्पर) डा. शेरपुर ,तहसील डलहौज़ी जिला चम्बा (हि.प्र ] लेखन विधाएं –कविता , कहानी , व लघुकथा प्रकाशित कृतियाँ – अंजुरी भर शब्द [कविता संग्रह ] व लगभग बीस राष्ट्रिय काव्य संग्रहों में कविता लेखन | सम्पादन --- मेरे पहाड़ में [कविता संग्रह ] विद्यालय की पत्रिका बुरांस में सम्पादन सहयोग | प्रसारण ----दूरदर्शन शिमला व आकाशवाणी शिमला व धर्मशाला से रचना प्रसारण | सम्मान----- हिमाचल प्रदेश राज्य पत्रकार महासंघ द्वारा आयोजित अखिल भारतीय कविता प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए पुरस्कृत , हिमाचल प्रदेश सिमौर कला संगम द्वारा लोक साहित्य के लिए आचार्य विशिष्ठ पुरस्कार २०१४ , सामाजिक आक्रोश द्वारा आयोजित लघुकथा प्रतियोगिता में देशभक्ति लघुकथा को द्वितीय पुरस्कार | इनके आलावा कई साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित | अन्य ---इरावती साहित्य एवं कला मंच बनीखेत का अध्यक्ष [मंच के द्वारा कई अन्तर्राज्यीय सम्मेलनों का आयोजन | सम्प्रति पता –अशोक ‘दर्द’ प्रवास कुटीर,गावं व डाकघर-बनीखेत तह. डलहौज़ी जि. चम्बा स्थायी पता ----गाँव घट्ट डाकघर बनीखेत जिला चंबा [हिमाचल प्रदेश ] मो .09418248262 , ई मेल --- ashokdard23@gmail.com

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