राजनीति

क्या 24 के चुनावों के बाद शून्य की ओर प्रयाण?

लगभग 70 दशकों तक एक चक्री राज्य करने के बाद क्या कांग्रेस का सूर्य अस्त होने की तैयारी में हैं जिसकी कोई सुबह न होंगी? दिनों दिन कांग्रेस छोड़ कर जाने वालों की फेहरिस्त में बढ़ोतरी होती जा रही हैं।सर्व प्रथम G23 ने कांग्रेस छोडी थी।उसके बाद कैप्टन अमरिंदर सिंघ की बेइज्जती के बाद उन्होंने भी कांग्रेस छोड़ दी थी जो कांग्रेस का पंजाब में गढ़ माने जाते थे।पार्टी छोड़ने वाले कांग्रेस के नेताओं की लिस्ट लंबी है होती जा रही हैं। पार्टी छोड़ने वाले कांग्रेस के नेताओं की लिस्ट लंबी है जिन्होंने कमजोर पार्टी से अपना नाता 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद छोड़ा है। इन नेताओं में उत्तर में जम्मू कश्मीर से लेकर दक्षिण में केरल तक के कांग्रेस नेता शामिल रहे हैं। इन सभी नेताओं के कांग्रेस छोड़ने की वजह कांग्रेस नेतृत्व और कांग्रेस की कार्यप्रणाली में कमियां और परिवारवादी ध्येय की वज़ह से पलायन देखने mil रहा हैं।

गुलाम नबी आजाद :
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्र और कांग्रेस पार्टी संगठन में कई बड़ी जिम्मेदारियां निभा चुके गुलाम नबी आजाद पार्टी नेतृत्व और पार्टी में निर्णय लेने की शैली पर सवाल उठा रहे थे और इस मसले पर उन्होंने कांग्रेस के दूसरे 22 नेताओं के साथ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र भी लिखा था. काफी वक्त तक अपनी मांगों पर पार्टी के अंदर अमल करने का इंतजार करने के बाद आखिरकार गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस पार्टी से एक लंबा चौड़ा पत्र लिखकर इस्तीफा दिया और लिखा था कि ‘कोई वापसी नहीं के बिंदु ‘ से कॉग्रेस को त्यागा था।

आरपीएन सिंह :
यूपी से कांग्रेस नेता और केंद्र में मंत्री रह चुके और कांग्रेस के अंदर संगठन में झारखंड का प्रभार संभाल चुके आरपीएन सिंह ने यूपी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस का दामन छोड़ अपने आप को भारतीय जनता पार्टी से जोड़ लिया।आरपीएन सिंह भी पार्टी की कार्यशैली से नाराज थे, कहा था पार्टी अब पहले जैसी नहीं रही।बीजेपी ने आरपीएन सिंह को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया हैं।
जितिन प्रसाद :
कांग्रेस से केंद्र में मंत्री और सांसद रह चुके जितिन प्रसाद साल 2022 में कांग्रेस का दामन छोड़ बीजेपी में शामिल हुए. बीजेपी ने जितिन प्रसाद को यूपी सरकार में मंत्री बनाया और 2024 का लोकसभा चुनाव में वरुण गांधी की जगह बीजेपी ने जितिन प्रसाद को भारतीय जनता पार्टी का उम्मीदवार बनाया है। मनमोहन सिंह सरकार में जितिन प्रसाद केंद्र में मंत्री थे।

संजय सिंह :
अमेठी से सांसद और विधायक रहने वाले संजय सिंह ने भी कांग्रेस को छोड़कर बीजेपी का दामन थामना बेहतर समझा था।

अशोक चव्हाण :
महाराष्ट्र में कांग्रेस के बड़े शहरों में से एक, पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के पूर्व महाराष्ट्र अध्यक्ष और सांसद रह चुके अशोक चव्हाण ने साल 2024 में कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थामा। अशोक चव्हाण भी कांग्रेस की कार्यशैली से नाराज थे.

नवीन जिंदल :
उद्योगपति और बतौर कांग्रेस के नेता के तौर पर जाने जानेवाले नवीन जिंदल ने साल 2024 में कांग्रेस का दामन छोड़कर बीजेपी का दामन थामा है. नवीन जिंदल कुरुक्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर सांसद रह चुके हैं और बीजेपी ने 2024 का लोकसभा चुनाव में भी कुरुक्षेत्र से नवीन जिंदल को अपना उम्मीदवार बनाया है।

रवनीत बिट्टू :
पंजाब के लुधियाना सीट से कांग्रेस के सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने कांग्रेस का दामन छोड़ साल 2024 में बीजेपी का दामन थाम लिया. बीजेपी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में लुधियाना से रवनीत सिंह बिट्टू को लोकसभा का उम्मीदवार बनाया है. रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब के सियासत का बड़ा नाम है और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं।

परनीत कौर :
अमरिंदर सिंह की पत्नी और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता परनीत कौर ने भी साल 2024 में बीजेपी का दामन थाम लिया, दरअसल साल 2023 में अमरिंदर सिंह का समर्थन करने की वजह से कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था। परनीत कौर पटियाला से सांसद है और 2019 में कांग्रेस की टिकट पर पटियाला से ही चुनाव जीती थी।इस बार बीजेपी ने परनीत कौर को पटियाला से पार्टी का उम्मीदवार बनाया है.

टॉम वडक्कन :
कांग्रेस के प्रवक्ता रह चुके टॉम बडक्कन मार्च 2019 में कांग्रेस का दामन छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए. बालाकोट एयर स्ट्राइक पर कांग्रेस के स्टैंड को टॉम वडक्कन ने कांग्रेस छोड़ने के मुख्य वजह बताई थी। टॉम वडक्कन बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता है।

सुष्मिता देव :
असम से सांसद रह चुकी और कांग्रेस से लंबे समय तक जुड़ी रही सुष्मिता देव ने कांग्रेस का दामन छोड़ तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा था।सुष्मिता देव अभी राज्यसभा में सांसद हैं। कांग्रेस में वह राष्ट्रीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी रह चुकी थी.

प्रियंका चतुर्वेदी :
कांग्रेस में तत्ती प्रवक्ता रह चुकी प्रियंका चतुर्वेदी ने कांग्रेस का हाथ छोड़कर शिवसेना ज्वाइन किया था। बाद में शिवसेना ने उन्हें राज्यसभा सांसद के तौर पर मनोनीत किया और अभी भी प्रियंका चतुर्वेदी पद पर कायम हैं।

अनिल एंटनी :
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व रक्षा मंत्री ए.के. एंटोनी के बेटे अनिल एंटनी ने जनवरी 2023 में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था. उन पर एक ट्वीट को डिलीट करने का दबाव था।अनिल एंटनी ने पार्टी से इस्तीफा देते वक्त कहा था कि मुझ पर एक ट्वीट को डिलीट करने के लिए असहिष्णुता के साथ दबाव बनाया जा रहा था और ऐसा वे लोग कर रहे थे जो फ्रीडम ऑफ स्पीच के लिए खड़े होने के दावे करते हैं।उन्होंने आगे कहा कि मैंने ट्वीट डिलीट करने से मना कर दिया,इसके साथ ही अनिल ने इस्तीफे का पत्र भी ट्वीट किया था। बाद में अनिल एंटनी ने बीजेपी का दामन थाम लिया और इस बार केरल से वह लोकसभा के उम्मीदवार भी हैं।

गौरव वल्लभ :

कांग्रेस के प्रवक्ता रह चुके और झारखंड और राजस्थान से कांग्रेस की टिकट पर विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमा चुके प्रोफेसर गौरव वल्लभ आखिरकार कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए। कॉंग्रेस के खूब पक्षकार रहे गौरव वल्लभ ने दो पन्नों का पत्र लिखकर राम मंदिर में भगवान राम के प्राण प्रतिष्ठा पर पार्टी के स्टैंड और देश के वेल्थ क्रिएटर्स को लगातार निशाना बनाए जाने पर नाराजगी का जिक्र अपने दो पन्नों के पत्र में किया।

ज्योतिरादित्य सिंधिया :
मध्य प्रदेश की सियासत के बड़े चेहरे और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी पार्टी से नाराज होकर भाजपा का दामन थामा। ये बात लोग अभी तक भूले न होंगे।सिंधिया की नाराजगी मध्य प्रदेश में कांग्रेस की राजनीति और पार्टी के फैसले से ज्यादा जुड़ी थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मार्च 2020 में कांग्रेस से त्याग पत्र देने के बाद, बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया और फिर केंद्र में मंत्री बनाया।

सुरेश पचौरी :
50 सालों तक कांग्रेस से जुड़े रहे मध्य प्रदेश के बड़े चेहरों में से एक सुरेश पचौरी ने मार्च 2024 में बीजेपी का दामन थामा।सुरेश पचौरी चार बार कांग्रेस की टिकट पर राज्यसभा के लिए चुने गए और केंद्र में मंत्री भी रह चुके थे। अपने कांग्रेस से जुड़ाव में सुरेश पचौरी ने एक बार लोकसभा और एक बार विधानसभा का चुनाव लड़ा लेकिन दोनों बार हार गए।

अर्जुन मोढवाडिया :
अयोध्या में राम मंदिर में भगवान राम के प्राण प्रतिष्ठा पर कांग्रेस के स्टैंड पर सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाने वाले गुजरात कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और पोरबंदर से विधायक अर्जुन मोढवाडिया ने साल 2024 के मार्च महीने में कांग्रेस से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थामा. अर्जुन मोढवाडिया 40 वर्षों तक कांग्रेस पार्टी से जुड़े रहे.

मिलिंद देवड़ा :
मनमोहन सिंह सरकार में केंद्र में मंत्री रह चुके मिलिंद देवड़ा ने जनवरी 2024 में कांग्रेस का हाथ छोड़कर शिवसेना का दामन थाम लिया। शिवसेना ने उन्हें बाद में राज्यसभा के लिए अपना उम्मीदवार बनाया और मिलिंद देवड़ा राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित। मिलिंद देवड़ा भी उन कांग्रेसी नेताओं में शामिल थे जो पार्टी की कार्यशैली से नाराज थे।

संजय निरुपम :
मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके और कांग्रेस के टिकट पर मुंबई से सांसद रह चुके संजय निरुपम को पार्टी विरोधी गतिविधियों की वजह से निष्कासित किया गया. संजय निरुपम पिछले कुछ दिनों से लगातार पार्टी के फैसलों के खिलाफ खास कर मुंबई में लोकसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे पर पार्टी के फैसले के खिलाफ बयान बाजी कर रहे थे। संजय निरुपम ने बताया कि कांग्रेस में गुटबाजी चल रही हैं और अभी तक पांच गुट हो गए है।

बॉक्सर बिजेंद्र सिंह :
मुक्केबाजी में भारत के पहले ओलंपिक पदक विजेता बॉक्सर विजेंद्र सिंह ने कांग्रेस का दामन छोड़ बीजेपी का साथ पकड़ लिया। दक्षिणी दिल्ली से पिछला लोकसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर विजेंद्र सिंह ने लड़ा था और इसबार भी मथुरा से चुनाव लड़ने के संभावित उम्मीदवारों में उनका नाम था।

राजेश मिश्रा :
वाराणसी से कांग्रेस के सांसद रह चुके राजेश मिश्रा ने मार्च 2024 में बीजेपी का दामन थाम लिया।

बाबा सिद्धिकी :
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री रह चुके बाबा सिद्दीकी ने फरवरी 2024 में कांग्रेस छोड़कर अजीत पवार की एनसीपी में शामिल हो गए।

विभाकर शास्त्री :
लाल बहादुर शास्त्री के पोते विभाकर शास्त्री ने कांग्रेस छोड़ बीजेपी में फरवरी 2024 में शामिल हुए।

आचार्य प्रमोद कृष्णम :
कांग्रेस में प्रियंका गांधी के करीबी माने जाने वाले और राजस्थान में सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने की वकालत करने वाले आचार्य प्रमोद कृष्णम को कांग्रेस ने पार्टी विरोधी बयान बाजी के लिए निलंबित कर दिया। आचार्य प्रमोद कृष्णम भी भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा में कांग्रेस पार्टी के स्टैंड से नाखुश थे और इसकी मुखालफत करते थे।

रोहन गुप्ता :
कांग्रेस के सोशल मीडिया विभाग के प्रमुख रह चुके रोहन गुप्ता ने हाल ही में कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस ने रोहन गुप्ता को गुजरात के लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार बनाया था लेकिन पिता की तबीयत का हवाला देकर रोहन गुप्ता ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली इसके बाद उनके खिलाफ कुछ प्रतिक्रियाएं पार्टी नेताओं की तरफ से की गई और इसलिए उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नाम पत्र लिखकर कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया।

अनिल शर्मा :
बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके अनिल शर्मा ने कांग्रेस में लंबा वक्त बिताने के बाद बीजेपी का दामन थामा।

प्रो. गौरव वल्लभ
कांग्रेस के प्रवक्ता प्रो. गौरव वल्लभ ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।उन्होंने कहा कि पार्टी के कुछ सहयोगी दलों ने सनातन धर्म के खिलाफ बयानबाजी की, इसके बावजूद पार्टी ने उसका विरोध नहीं किया। गौरव वल्लभ ने भी बीजेपी की सदस्यता ली है। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर झारखंड के जमशेदपुर से लोकसभा और राजस्थान के उदयपुर से विधानसभा चुनाव लड़ा था। मगर उनको कोई सफलता हासिल नहीं हो सकी। लोकसभा के चुनाव से पहले बीजेपी में आकर वो भी चुनावी वैतरणी को पार करने की इच्छा धारित करने वाले अभी भी कईं कांग्रेसी मौके के ताक में बैठे होंगे।
पुत्र मोह में अंधे ध्रुतराष्ट्र से नेता और पार्टी में ही लोकशाही के अभाव, अनरगल वक्तव्योँ और व्यक्तिगत टिप्पणीयों जैसे कईं मुद्दों की वज़ह से गिरता नैतिक स्तर क्या रसातल में ले पहुंचेगा कांग्रेस को?

— जयश्री बिर्मी

जयश्री बिर्मी

अहमदाबाद से, निवृत्त उच्च माध्यमिक शिक्षिका। कुछ महीनों से लेखन कार्य शुरू किया हैं।फूड एंड न्यूट्रीशन के बारे में लिखने में ज्यादा महारत है।