राजनीति

इंडिया मिडल ईस्ट कॉरिडोर

इसरायल में स्थित हाइफा पोर्ट और ओमान में स्थित दुक्म पोर्ट… दोनों का परिचालन भारत को मिला है। और अरब देशों के बीच ये जो red lines दिख रही हैं… यह अरब में प्रस्तावित रेल नेटवर्क है जिसका प्रोजेक्ट भी भारत को प्राप्त हुआ है। यानि एक छोर के पोर्ट (दुक्म) को रेल लाइन के माध्यम से दूसरे छोर के पोर्ट (हाइफा) को जोड़ना है… और ये रेल नेटवर्क अरब के सभी देशों और प्रमुख नगरों को भी जोड़ेगा… जैसे कि अमीरात, ओमान, बैहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन, मिस्र जैसे देश और अम्मान, दुबई, आबुधाबी, मस्कट, रियाद, जेद्दाह, येरुशलम, तेल अवीव जैसे प्रमुख नगर।।

यह सारी परियोजना IMEC के लिए है… यानि इंडिया मिडल ईस्ट कॉरिडोर को लेकर, जिसका अधिकतर परिचालन भारत के जिम्मे होगा। भारतीय बंदरगाहों के चलकर अरब में स्थिति भारत द्वारा संचालित दुक्म बंदरगाह से एशिया जुड़ेगा… फिर भारत द्वारा संचालित हाइफा बंदगाह से यूरोप जुड़ेगा।।

भारत – यूरोप कॉरिडोर के मध्य में 8 देश जुड़ते हैं… इसरायल, सऊदी, अमीरात, ओमान, बैहरीन, कतर, कुवैत, मिस्र। यदि यमन से हूथीयों का सफाया कर दिया जाता है तो यमन भी इस कॉरिडोर से जुड़ सकता है अरब रेल नेटवर्क का यमन तक विस्तार होने से।।

सभी पक्षों को इस कॉरिडोर से अपने-अपने फायदे हैं :-

1) भारत चीन के BRI प्रोजेक्ट की काट चाहता था जो उसे IMEC के रूप में मिल गई है।।

2) स्वेज नहर के कारण जो महत्व इस समय मिस्र का है। IMEC के कारण वही महत्व इसरायल, सऊदी, ओमान, जॉर्डन का बन जाएगा।।

3) जॉर्डन जोकि लैंड लॉक्ड देश था, इस कॉरिडोर ने बैठे बिठाए उसको नए आर्थिक अवसर प्रदान कर दिए हैं।।

4) IMEC से मिस्र को बहुत नुकसान उठाना पड़ता, परंतु उसने समझदारी दिखाते हुए IMEC से जुड़ जाना उचित समझा। क्योंकि अब मिस्र का पोर्ट सैद अरब रेल नेटवर्क से जुड़ेगा जो आगे जाकर ओमान के दुक्म पोर्ट की ओर जाता है। IMEC के अंतर्गत एशिया और पश्चिमी यूरोप को जोड़ने वाले गलियारे का केंद्र बिन्दु मिस्र का पोर्ट सैद होगा। तथा पूर्वी यूरोप और एशिया को जोड़ने वाले गलियारे का केंद्र बिन्दु इसरायल का हाइफा पोर्ट होगा।।

5) एशिया, अरब देश, यूरोप, मिस्र, अमरीका… वर्तमान के पारंपरिक मार्ग से इन देशों को 3 मुख्य समस्या आ रही थी :-

a) सोमालिया और हूथी संगठनों के कारण लाल सागर मार्ग अब सुरक्षित नहीं रहा था।।
b) ईरान द्वारा होर्मुस जलडमरू मार्ग बंद कर देने से तेल संकट पैदा हो जाता है दुनिया के सामने।।
c) सीरिया, इराक, ईरान, अफगानिस्तान, रूस के कारण एशिया का व्यापार मार्ग यूरोप से नहीं जुड़ पा रहा है पिछले काफी दशकों से।।

ऐसे में प्रस्तावित IMEC मार्ग इन्हीं 3 समस्याओं का समाधान करता है। ईरान के चाबहार पोर्ट से अधिक महत्वपूर्ण IMEC परियोजना है भारत के लिए। चाबहार पोर्ट के पीछे भारत का उद्देश्य केवल अफगानिस्तान को सप्लाई चैन से जोड़ना था। हालांकि यह पोर्ट भारतीय सप्लाई चेन को मध्य एशियाई देशों और रूस से जोड़ने की भूमिका भी निभा सकता था परंतु उसके लिए चाबहार पोर्ट और तुर्कमेनिस्तान के बीच एक रेल नेटवर्क चाहिए। जिसपर ईरान गंभीरता नहीं दिखा रहा है, जबकि भारत काफी समय से यहां रेल नेटवर्क निर्माण का प्रस्ताव पेश कर रहा है ईरान के सामने। ईरान की बेरुखी देखते हुए भारत अब चाबहार पोर्ट का विकल्प ढूंढ रहा है, इस काम के लिए एक स्थाई गलियारे की प्लानिंग है। यानि POK हथियाना… जिसके बाद ही भारत अफगानिस्तान और मध्य एशिया से जुड़ सकता है।

— आर्यन (दिल्ली)