ग़ज़ल
रंगों का भण्डार है बालम।
बस यारों का यार है बालम।
छाओं जैसी प्रतिष्ठा है,
आभा का श्रृंगार है बालम।
दिल से जब खींचे रेखाएं,
फिर पक्का इक़रार है बालम।
दुश्मन भी तारीफ़ करे है,
म्यान में बंद तलवार है बालम।
शोभा और बढ़ा देता है,
फूलों वाला हार है बालम।
फूलों की रखवाली करता,
बेशक लगता ख़ार है बालम।
विभन्न सुन्दर गुल खिलते हैं,
ग़ज़लों का गुलज़ार है बालम।
शीश हथेली पर रखता है,
सच्चा पहरेदार है बालम।
सूरज की भांति उदय अस्त,
सब का खि़दमतदार है बालम।
आत्म सम्मान बढ़ा देता है,
एैसी इक ललकार है बालम।
सहिल का शौक़ीन नहीं है,
लहरों का दिलदार है बालम।
सब धर्मो का इक संग्रह है,
वैसे इक सरदार है बालम।
ग़ज़ल-कहानी के लश्कर में,
दो धारी तलवार है बालम।
नदिया ऊपर पुल जैसा है,
साझा का किरदार है बालम।
उस को नापा जा नहीं सकता,
धरती का आकार है बालम।
ग़ज़ल सुना कर मोह लेता है,
बालम आखि़रकार है बालम।
— बलविन्दर बालम
