बजता है जल तरंग
बारिश की बूँदों ने आकर,
सपन सलोने दे डाले,
अवनी भी उल्लासित होकर,
खोल रही दिल के ताले।
पवन चले जो मंद मंद तो
बढ़े देख दिल की धड़कन,
आँखें गड़ा कर देहरी पर
निर्निमेष ताके बिरहन।
आएँगे अब मेरे प्रियवर
मनहर सपने हैं पाले।
अवनी भी उल्लासित होकर,
खोल रही दिल के ताले।
दिल के तार अब बजने लगे
मन मयूर करते नर्तन,
बाँध के पायल पैरों में
रमणी चलती छन छन छन।
पंछी मानो गीत सुनाते
सुन सजनी तू भी गा ले
अवनी भी उल्लासित होकर,
खोल रही दिल के ताले।
बारिश की बूँदों ने आकर,
सपन सलोने दे डाले,
अवनी भी उल्लासित होकर,
खोल रही दिल के ताले।
— सविता सिंह मीरा
