कविता

शहीदों की कुर्बानी

आजादी का ये पल शहीदों की मेहरबानी है ,
शीश कटाने वाले देशभक्तों की कुर्बानी है।
सदियों तक अमर रहेगी स्वतंत्रता की ये कहानी है ,
तिरंगे की लाल रंग बलिदान की अमर निशानी है।
स्वतंत्रता के लिए वीरों का वर्षों तक संघर्ष हुआ,
तब जाकर देश में आजादी का सूर्योदय हुआ।
आजादी के खातिर कितनों ने दी अपनी कुर्बानी है,
मातृभूमि के खातिर जिन्होंने दी अपनी जवानी है ।
आजादी की एक – एक सांस की कीमत चुकायी है ,
मातृभूमि के वीर सपूतों ने मौत को गले लगायी है।
उनके कर्जों को जीवन भर चुकाया नहीं जायेगा ,
उनके एहसानों को कभी भुलाया नहीं जायेगा।
लालकिला पर जब-जब तिरंगा लहरायेगी,
तब-तब उन वीर शहीदों की याद आयेगी ।

— हितेश्वर बर्मन “चैतन्य”

हितेश्वर बर्मन चैतन्य

डंगनिया (कोसीर), सारंगढ़ , छत्तीसगढ़ email - hiteshwarbarman87@gmail.com