ईर्ष्या पर भी घमंड
किसी की सफलता पर ईर्ष्या करना
हां कुछ लोगों को बहुत भाता है,
क्योंकि उन्हें बस सिर्फ यहीं काम आता है,
खैर हद तो तब होता है
जब कोई अपनी ईर्ष्या पर भी घमंड करे,
पांव जमीन पर भी न धरे,
दुनिया को दिखाने जिंदगी हसीन,
खा जाते हैं पुरखों की सहेजी जमीन,
ऊपर से अपनों से ही बेईमानी,
जैसे कोई गुण दिखा रहा हो खानदानी,
बेईमानों का बेईमान जब औरों की कान भरे,
ढिंढोरा पीट पीट खुद को ईमानदार धरे,
भाई हो भाई का खून चूसे,
तो क्यों न कहें बहुत बड़ा घमंडी उसे,
दूसरों का हिस्सा खा ख्वाब सेवक बनने का,
अंडे से निकले बिना चाह चूजा बनने का,
तो मान लीजिए उसे ईर्ष्या का घमंड है,
बढ़ने की बात पता नहीं
योग गिरने का बन रहा प्रचंड है।
— राजेन्द्र लाहिरी
