ये सच है
ये सच है कि एक दिन मैं न रहूंगा
तुम ढूंढोगे मुझे
पर मैं कहीं नजर न आऊंगा
जब मेरी याद हद से ज्यादा सताने लगे
पढ़ लेना मेरी किताबें
मैं तुमसे बातें करने लगूंगा
अक्षर- अक्षर मेरी सांसों की गर्माहट
तुमको एहसास कराएगी
मैं सदियों से जिंदा हूं सदियों तक
मेरी किताबें तुम्हें बतायेंगी
चाहे जितने युग आएं- जाएं
सूरज तब भी था और आगे भी रहेगा…।
— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
