युग-निर्माण का महामंत्रः ‘कर्तव्य पथ‘ पर चलता विकसित भारत
प्रथम चरणः अतीत का गौरव, भविष्य का आह्वान
हम उस भारत के नागरिक हैं, जहाँ के कण-कण में अध्यात्म है और जिसकी विरासत में ज्ञान का सागर। हमने सदियों की गुलामी देखी, पर हमारी आत्मा नहीं झुकी। आज, जब दुनिया कह रही है कि ‘यह शताब्दी एशिया की है‘, तब यह हमारा ‘युगधर्म‘ है कि हम सिद्ध करेंः यह शताब्दी भारत की है!
प्रधानमंत्री जी ने हमें ‘विकसित भारत /२०४७‘ का जो संकल्प दिया है, वह केवल लक्ष्य नहीं हैकृवह हमारे सामूहिक ‘कर्म‘ की कसौटी है। संकल्प और सिद्धि के बीच का पुल केवल एक ही चीज से बनता हैः हमारा अडिग चरित्र और राष्ट्र के प्रति हमारा प्रथम प्रेम।
द्वितीय चरणः हमारा ‘पंचामृत‘ संकल्प
भारत को विश्व-गुरु बनाने के लिए हमें पाँच अमृत तत्वों को अपने जीवन का आधार बनाना होगाः
अमृत-१ः ‘कर्म‘ ही ‘राष्ट्र धर्म‘ है (च्मतवितउंदबम पे च्पमजल)
राष्ट्र का चरित्र उस छोटे से नागरिक से शुरू होता है जो सड़क पर कूड़ा नहीं फेंकता, उस कर्मचारी से जो समय पर काम पूरा करता है, और उस नेता से जो पारदर्शिता को अपना ‘राजधर्म‘ मानता है।
भ्रष्टाचार पर वारः ‘मेरा क्या?‘ की भावना ही भ्रष्टाचार की जननी है। हमें इस भावना को ‘राष्ट्र का क्या?‘ में बदलना होगा। जिस दिन भारत का हर नागरिक अपने ‘कर्तव्य‘ को अपनी पूजा मान लेगा, उस दिन हर व्यवस्था में अपने आप ‘शुचिता‘ आ जाएगी।
‘कटी हुई नाल‘ का विसर्जनः जातिवाद, क्षेत्रवाद और संकीर्ण राजनीतिकृये हमारी ‘कटी हुई नाल‘ हैं जो हमें असली शक्ति से काटती हैं। हमें उस ‘मित्र गर्भनाल‘ की ऊर्जा से जुड़ना होगा, जो हमें ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत‘ बनाती है।
अमृत-२ः युवा शक्ति और नव-भारत का क्छ।
हमारी युवा शक्ति केवल संसाधन नहीं, बल्कि ‘परिवर्तन‘ का इंजन है। हमें उन्हें नौकरी का पीछा करने वाला नहीं, बल्कि जॉब क्रिएटर बनाना है।
डिजिटल पुरुषाथर्ः ‘डिजिटल इंडिया‘ के माध्यम से भारत ने दुनिया को दिखा दिया कि हम केवल उपभोक्ता नहीं, नवाचार के निर्माता हैं। हमारे युवाओं को अब हर क्षेत्रकृकृषि से लेकर अंतरिक्ष तककृमें समस्याओं का समाधान खोजना होगा।
फिट इंडिया, हिट इंडियाः स्वस्थ देह में ही स्वस्थ राष्ट्र का निवास होता है। ‘फिट इंडिया‘ का आह्वान केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और आत्मिक मजबूती का संकल्प है।
अमृत-३ः नारी शक्तिकृराष्ट्र की निर्णायक शक्ति
विकास का पहिया तब तक तेज नहीं घूम सकता, जब तक आधी आबादी की पूरी भागीदारी न हो। ‘नारी शक्ति‘ भारत की सबसे बड़ी अनदेखी हुई पूंजी है।
हमें महिलाओं को केवल सशक्त नहीं करना है, बल्कि उन्हें विकास का नेतृत्व देना है। शिक्षा, उद्यम और निर्णय-प्रक्रियाकृहर जगह उनकी उपस्थिति अनिवार्य है। ‘बेटी बचाओ‘ से लेकर ‘नारी के नेतृत्व में विकास‘ तक, यह हमारी सभ्यता का सबसे बड़ा निवेश है।
अमृत-४ः ‘लोकल फॉर ग्लोबल‘ और आत्मनिर्भरता का शंखनाद
वैश्विक मंच पर सम्मान ताकत से मिलता है, पर सम्मान की रक्षा स्वावलंबन से होती है। ‘आत्मनिर्भर भारत‘ का अर्थ हैः अपनी जरूरतों के लिए किसी पर निर्भर न रहना।
जब हम ‘लोकल‘ उत्पाद अपनाते हैं, तो हम केवल एक वस्तु नहीं खरीदते, बल्कि देश के एक परिवार को रोजगार देते हैं। यह छोटी-सी शुरुआत हमारे देश को विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बना देगी।
अमृत-५ः ‘वसुधैव कुटुंबकम‘-विश्व गुरु का सिंहासन
ळ20 की सफल अध्यक्षता में भारत ने दिखा दिया कि हमारी विदेश नीति, मानव-केंद्रित वैश्वीकरण पर आधारित है।
आज, विश्व भारत को समस्याओं का समाधानकर्ता (ैवसनजपवद च्तवअपकमत) मानता है। हम ही हैं जो ‘ग्लोबल साउथ‘ की आवाज को उठाते हैं। हमारा धर्म है कि हम ‘एक धरती, एक परिवार, एक भविष्य‘ के मंत्र को जीकर, विश्व को योग, शांति और समृद्धि का मार्ग दिखाएँ।
निष्कषर्ः भारत, तुम ‘अधूरा भविष्य‘ नहीं, ‘सनातन पूर्णता‘ हो!
यह समय ‘मौन चीख‘ का नहीं, बल्कि सिंहनाद का है! आइए, हम हर प्रकार के निराशावाद को त्याग दें। कोई भी चुनौती, कोई भी विघटनकारी शक्ति हमारे चरित्र और हमारे संकल्प से बड़ी नहीं है।
जब देश का मुखिया हमें एक ‘परिवार‘ मानकर राह दिखा रहा है, तो हमारा ‘धर्म‘ है कि हम कदम से कदम मिलाकर चलें।
हम भारत हैं। हम रुकेंगे नहीं। हम झुकेंगे नहीं। हम परम वैभव को प्राप्त करके रहेंगे!
गगनभेदी स्वर में कहोः विकसित भारत, हमारा संकल्प!
जय हिंद! जय भारत!!
— आचार्य डॉ. सोमेंद्र शास्त्री
