कविता

तुलसी

तुलसी आंगन में जहां ।
रोग – शोक न हों वहां ।।

बनते सभी बिगड़े काम ।
तुलसी जीवंत देवी नाम ।।

सेवन करते पाप मिटें ।
शारीरिक बंधन कटें ।।

उस आंगन रहती खुशहाली ।
तुलसी रहे सदा हरियाली ।।

तुलसी को नित दो जलधार।
निश्चित ही हो जाये उद्धार ।।

तुलसी में औषधीय गुण अपार ।
तुलसी में देवीय शक्ति का सार।।

— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

नाम - मुकेश कुमार ऋषि वर्मा एम.ए., आई.डी.जी. बाॅम्बे सहित अन्य 5 प्रमाणपत्रीय कोर्स पत्रकारिता- आर्यावर्त केसरी, एकलव्य मानव संदेश सदस्य- मीडिया फोरम आॅफ इंडिया सहित 4 अन्य सामाजिक संगठनों में सदस्य अभिनय- कई क्षेत्रीय फिल्मों व अलबमों में प्रकाशन- दो लघु काव्य पुस्तिकायें व देशभर में हजारों रचनायें प्रकाशित मुख्य आजीविका- कृषि, मजदूरी, कम्यूनिकेशन शाॅप पता- गाँव रिहावली, फतेहाबाद, आगरा-283111