तुलसी
तुलसी आंगन में जहां ।
रोग – शोक न हों वहां ।।
बनते सभी बिगड़े काम ।
तुलसी जीवंत देवी नाम ।।
सेवन करते पाप मिटें ।
शारीरिक बंधन कटें ।।
उस आंगन रहती खुशहाली ।
तुलसी रहे सदा हरियाली ।।
तुलसी को नित दो जलधार।
निश्चित ही हो जाये उद्धार ।।
तुलसी में औषधीय गुण अपार ।
तुलसी में देवीय शक्ति का सार।।
— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
