धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

गीता – जीवन का आधार

विश्व के समस्त धर्म-ग्रंथों में श्रीमद्भभगवद्गीता का स्थान अद्वितीय है यह केवल भारतीय दर्शन, धर्म तथा संस्कृति का प्रतीक ही नहीं हैं अपितु मानव जीवन को सहजता से जीने की शैली है I गीता का वास्तविक नाम है – श्रीमद्भभगवद्गीता अर्थात् श्री भगवान के द्वारा गाई गई उपनिषद् I इसमें ब्रह्मविषयक ज्ञान निहित होने के कारण यह ब्रह्मविद्या है तथा उसके साथ ज्ञान की प्राप्ति के उपाय भी का वर्णन होने के कारण यह योगशास्त्र भी है I गीता में सन्निहित सत्य केवल भारतीयों के लिए ही नहीं बल्कि यह किसी भी देश, काल, जाति, वर्ण, आश्रम एवं सम्प्रदाय के मानव के लिए सामान रूप से उपयोगी है I यह ग्रन्थ सार्वभौम, सार्वजनीन सत्य सिध्दान्त का ही प्रतिपादन करती है I
        हमारे सनातन धर्म का मूल वेद है I अन्य सभी धर्म-ग्रन्थ वेद द्वारा प्रतिपादित धर्म को समझने के लिए ही रचित हुए हैं I विषयवस्तु की दृष्टि से इसके दो विभाग – कर्मकाण्ड और ज्ञानकाण्ड माने जाते हैं I कर्मकाण्ड में पूजा, यज्ञादि की विधियाँ तथा ज्ञानकाण्ड में ताप, ध्यान, आध्यात्मिकता का वर्णन है I गीता में दोनों की विस्तृत व्याख्या मिलती है तथा मार्गदर्शन भी I जिसका अनुसरण करके साधक अपने कर्मों को पूरी निष्ठा से करते हुए, सांसारिक दायित्यों को निभाता हुआ मोक्ष को प्राप्त कर लेता है I  यद्यपि महाभारत के अंतर्गत होने के कारण गीता स्मृतिग्रन्थ है, किन्तु अपनी विशिष्टता के कारण इसकी गणना उपनिषदों की श्रेणी में होती हैI
क्रमशः

— डाॅ अनीता पंडा ‘अन्वी’

*डॉ. अनीता पंडा

सीनियर फैलो, आई.सी.एस.एस.आर., दिल्ली, अतिथि प्रवक्ता, मार्टिन लूथर क्रिश्चियन विश्वविद्यालय,शिलांग वरिष्ठ लेखिका एवं कवियत्री। कार्यक्रम का संचालन दूरदर्शन मेघालय एवं आकाशवाणी पूर्वोत्तर सेवा शिलांग C/O M.K.TECH, SAMSUNG CAFÉ, BAWRI MANSSION DHANKHETI, SHILLONG – 793001  MEGHALAYA aneeta.panda@gmail.com