कविता

अटल : शब्द, सत्ता और राष्ट्र

ग्वालियर की पावन भूमि से
उठा एक स्वर, नाम था अटल,
जिसकी वाणी में वेदों की गूँज,
जिसका मन था पर्वत-सा अडिग, अचल।

बालक नहीं, भविष्य था वह,
संस्कारों में भारत की शान,
पिता ने दिया ज्ञान का दीप,
माँ ने सौंपा राष्ट्र का मान।

कलम चली तो कविता जागी,
शब्दों में सच्चाई का तेज,
राजनीति आई तो सेवा बनी,
निज स्वार्थ से कोसों दूर वह वेग।

विचार टकराए, मतभेद हुए,
पर मर्यादा की सीमा न टूटी,
शत्रु भी जिसके शिष्टाचार से
सम्मान की भाषा ही बूटी।

जनसंघ से संसद की सीढ़ी तक
संघर्षों ने पग-पग आज़माया,
हारा नहीं जो हार में भी,
हर पराजय से भविष्य रचाया।

“हार नहीं मानूँगा” यह पंक्ति
उस पुरुष की आत्मा थी,
विपक्ष में रहकर भी जिसने
लोकतंत्र की लौ जलाए रखी।

तीन बार सिंहासन मिला उसे,
पर सिंहासन उस पर न चढ़ा,
सत्ता सिर झुकाती थी उसके आगे,
वह जनता के चरणों में खड़ा।

पोखरण की गर्जना ने बताया,
भारत अब निर्बल नहीं,
शांति चाहता है, युद्ध नहीं,
पर आत्मसम्मान पर समझौता नहीं।

लाहौर तक चली मैत्री-बस,
सीमा लांघती मानवता की ध्वनि,
“बातचीत से निकलेगा समाधान,”
यह अटल की विश्व-वाणी बनी।

कारगिल की रणभूमि साक्षी बनी,
संयम, शौर्य और नीति का मेल,
विजय भी मिली, मर्यादा भी बची,
यही राजधर्म का अंतिम खेल।
सड़कें, संचार, शिक्षा, विकास,
भारत को जोड़े नए सूत्र,
राज्यों की रचना में भी दिखी
उस दृष्टा की दूरगामी दृष्टि अमूर्त।

कवि अंत तक जीवित रहा,
सत्ता भी कविता से हारी,
“मौत से ठन गई” लिखने वाला
आशा की मशाल रहा, अविचल, भारी।

सम्मान मिले, शिखर मिले,
भारत-रत्न भी चरणों में आया,
पर सबसे बड़ा सम्मान वही था,
जो जन-हृदय में अटल ने पाया।

आज 101वीं जयंती पर
भारत गर्व से करता उद्घोष,
एक व्यक्ति नहीं, एक युग थे आप, अटल जी!
राष्ट्र आपको करता कोटि-कोटि नमन, जयघोष।

— रूपेश कुमार

रूपेश कुमार

भौतिक विज्ञान छात्र एव युवा साहित्यकार जन्म - 10/05/1991 शिक्षा - स्नाकोतर भौतिकी , इसाई धर्म(डीपलोमा) , ए.डी.सी.ए (कम्युटर),बी.एड(फिजिकल साइंस) वर्तमान-प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी ! प्रकाशित पुस्तक ~ *"मेरी कलम रो रही है", "कैसें बताऊँ तुझे", "मेरा भी आसमान नीला होगा", "मैं सड़क का खिलाड़ी हूँ" *(एकल संग्रह) एव अनेकों साझा संग्रह, एक अंग्रेजी मे ! विभिन्न राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओ मे सैकड़ो से अधिक कविता,कहानी,गजल प्रकाशित ! राष्ट्रीय साहित्यिक संस्थानों से सैकड़ो से अधिक सम्मान प्राप्त ! सदस्य ~ भारतीय ज्ञानपीठ (आजीवन सदस्य) पता ~ ग्राम ~ चैनपुर  पोस्ट -चैनपुर, जिला - सीवान  पिन - 841203 (बिहार) What apps ~ 9934963293 E-mail - - rupeshkumar01991@gmail.com