कविता

यू न सरेआम बदनाम होते

काश हम मोहब्बत से अंजान होते,
यू न सरे आम बदनाम होते !
न बिगड़ती बाते,न रुकती सांसे,
न छूटता उसका साथ,
न होता दूजेपन का एहसास,
न रातों को आंसुओं से भीगता तकिया,
अगर उसकी बातों को प्यार
समझ कर किया होता शुक्रिया!
न होती अकेलेपन की तड़फन,
न होती बिखरते सपनों की उलझन,
अगर हम भी उनकी झूठी बातों को मान लेते,
यू न सरेआम बदनाम होते,
आज वो हमारी जान होते,हम उनकी जान होते,
काश हम मोहब्बत से अंजान होते!
लगता है,वो अदाएं थी झूठी,
उस वक्त सारी फिजाएं थी मुझसे रूठी,
यू ही हम अपने को बदनाम कर बैठे,
बिना सोचे समझे एक शख्स से प्यार कर बैठे!
काश हम मोहब्बत से अंजान होते,
यू न सरे आम बदनाम होते !

— प्रशांत अवस्थी ‘रावेंद्र भैय्या’

प्रशांत अवस्थी 'रावेन्द्र भैय्या'

आत्मज- श्रीमती रेखा देवी एवं श्री शुभकरन लाल अवस्थी. जन्मतिथि - 18 सितम्बर 2005. जन्म स्थान - ग्राम अफसरिया ,महमूदाबाद सीतापुर उ.प्र. शिक्षा- डी.एड.स्पेशल एजुकेशन में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, मोबाइल नंबर -9569726127. G-mail- theprashantawasthis.pa@gmail.com