कविता

हंसी खुशी खुशी खुशी

काम ही उनका झूठी हमदर्दी जताना है,
इस काम में वो एकदम माहिर सयाना है,
जोशीला,मलंग और मतवाले हैं,
हर जगह हर परिस्थिति में अपना काम निकाले हैं,
थोड़ी सी हमदर्दी,थोड़ी सी तसल्ली
कर जाता है बहुत बड़ा काम,
भावनाओं से जरा सा खेलना बस होता है
जिसे नहीं कर पाते बड़े बड़े नाम,
उनको भी पता है कि
यही मेरा सबसे बड़ा शत्रु है लेकिन
उनके थोड़े से मिठास वाली बानी में
फिसल कर ऐसे गिर जाते हैं और
अपना दिल,गुर्दा,जान के साथ
वो सब कुछ लुटाने को तैयार हो जाते हैं
जिससे अंततः हार या बर्बादी संभावित है,
चतुर अपनी चतुराई का इस्तेमाल कर लेता है,
बिना ऊंच नीच,जाति पाती जाहिर किये
और उनके बिना सोचे समझे किये गये समर्थन से,
हासिल कर लेते हैं
उनके ही विरुद्ध कार्य करने का हौसला,
फिर होते रहना है ताउम्र हलाल,
मुस्कायेगा सामाजिक दलाल,
चंद फेंके गए टुकड़ों के खातिर,
दुश्मनों में अपने समाज के
कौन बहुरूपिया छुपा है,
हम कोशिश ही नहीं करते और
उंगली,बांह के साथ गर्दन भी पकड़ा देते हैं,
खुशी खुशी,हंसी खुशी।

— राजेन्द्र लाहिरी

राजेन्द्र लाहिरी

पामगढ़, जिला जांजगीर चाम्पा, छ. ग.495554