चाहतों के घर
चाहतों के घर ‘हर दिल’ में बसाया करों,
राहतों की सौगात सभी को दिया करो।
पूछते रहों हमेशा अपने-अपनों का हाल,
याद किया करों जन्मदिन पर हर साल।
गुरूजी कहते हैं प्रेम से ही जीतो सबको,
सदा याद रखों जन्म दिया उसने सबको।
यह पल-पल हर सांस उसकी ही नेमत है,
स्वयं खुद रखों ध्यान ये तुम्हारी सेहत है।
नहीं है यह ‘जिंदगी’ सिर्फ चंद सालों की,
सचमुच सिर्फ पेट भरने एवं निवालों की।
यूं खूब जियो इसे और होते जाओ संतुष्ट,
क्या तेरा और क्या मेरा हम होंगे हष्ट-पुष्ट।
— संजय एम तराणेकर
