होली है
अब होली के हुड़दंग कहाँ
बचपन के वो दोस्त कहाँ
पहले वाली अब बात कहाँ
न पहले सा रंग बचा
न ही वह मेल मिलाप
घर घर जा होरा दे
गले मिलने का रिवाज़ अब कहाँ
ढ़ोल की थाप पर नाच
घुटती भाँग
दरवाज़े दरवाज़े मिलती
गुजिया और अनरसे के दीदार कहाँ
न बची फगुनाई
न हँसी ठिठोली
अब पहले जैसे रंग कहाँ
यारन के अब वो संग कहाँ
