राजनीति

उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ रहा है पर्यटन आधारित राजस्व

भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की पहचान दशकों तक राजनीतिक उठापटक, कानून-व्यवस्था की चुनौतियों और पिछड़ेपन के लिए होती थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस राज्य की छवि में एक ऐतिहासिक बदलाव आया है। आज उत्तर प्रदेश घरेलू पर्यटकों की संख्या के मामले में लगातार तीन वर्षों से देश में पहले स्थान पर है और यह कोई संयोग नहीं, बल्कि सुनियोजित नीतियों, अवसंरचनात्मक विकास और सांस्कृतिक-धार्मिक विरासत के सक्रिय दोहन का परिणाम है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के ताजा आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2024 में राज्य में कुल 64 करोड़ 90 लाख से अधिक पर्यटक आए, जबकि 2023 में यह संख्या 48 करोड़ 1 लाख के आसपास थी। यानी मात्र एक वर्ष में लगभग 17 करोड़ पर्यटकों की वृद्धि — यह संख्या कई यूरोपीय देशों की कुल आबादी से भी कहीं अधिक है। इस विस्फोटक वृद्धि के पीछे जो आर्थिक बल छिपा है, वह उत्तर प्रदेश को एक नई दिशा दे रहा है।

पर्यटन क्षेत्र की आर्थिक संभावना को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि वर्ष 2020-21 से 2023-24 के बीच राज्य के पर्यटन क्षेत्र में 44.9 प्रतिशत की संचयी वृद्धि दर्ज की गई। योगी सरकार ने 2023-24 से 2024-25 के लिए पर्यटन क्षेत्र में 19.2 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि का लक्ष्य रखा था, जिसे हासिल कर लिया गया। वर्ष 2022 में जब घरेलू पर्यटकों की संख्या 32 करोड़ थी, उस समय घरेलू पर्यटकों के खर्च से राज्य को 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई थी और विदेशी पर्यटकों से लगभग 10,500 करोड़ रुपये मिले थे। 2024 तक आते-आते राज्य में पर्यटकों की संख्या दोगुनी हो चुकी थी, और SBI की एक रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश को पर्यटन से होने वाला राजस्व 4 लाख करोड़ रुपये के स्तर को छू सकता है। इसके अलावा, 2025 में प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेले से अकेले 3.50 लाख करोड़ रुपये के राजस्व सृजन का अनुमान लगाया गया, जो इस क्षेत्र की व्यापक आर्थिक क्षमता को रेखांकित करता है।

अयोध्या का उदय इस पूरी कहानी का सबसे प्रभावशाली अध्याय है। जनवरी 2024 में राम मंदिर में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में पर्यटकों का ऐसा सैलाब उमड़ा, जिसकी कल्पना शायद नीति-निर्माताओं ने भी नहीं की थी। वर्ष 2016 में अयोध्या में मात्र 2.83 लाख पर्यटक आते थे। 2023 में यह संख्या 5.75 करोड़ तक पहुँची। राम मंदिर के उद्घाटन के बाद 2024 में यह आँकड़ा 16 करोड़ को पार कर गया और 2025 के पहले छह महीनों में ही 23 करोड़ से अधिक श्रद्धालु अयोध्या पहुँच चुके थे। यह वृद्धि केवल संख्याओं तक सीमित नहीं है — इसका सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। अयोध्या का पर्यटन क्षेत्र इस समय प्रतिवर्ष 8,000 से 12,500 करोड़ रुपये तक का राजस्व उत्पन्न कर रहा है, जो होटल, परिवहन, खुदरा व्यापार और सेवा क्षेत्र के माध्यम से स्थानीय लोगों तक पहुँचता है। अनुमान है कि 2028 तक यह आँकड़ा 18,000 से 20,000 करोड़ रुपये तक पहुँच जाएगा और अयोध्या उत्तर प्रदेश के प्रस्तावित 70,000 करोड़ रुपये के पर्यटन राजस्व में एक-चौथाई हिस्सा अकेले योगदान देगी। अयोध्या अब उत्तर प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) में 1.5 प्रतिशत का योगदान कर रही है, जो आने वाले वर्षों में और बढ़ने की उम्मीद है।

काशी और मथुरा की भी यही कहानी है। वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण से पहले मंदिर में प्रतिवर्ष लगभग 50 लाख श्रद्धालु आते थे, जो अब बढ़कर 6 करोड़ तक पहुँच गए हैं — एक दशक में बारह गुना की वृद्धि। वर्ष 2024 में वाराणसी में कुल 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आए। मथुरा-वृंदावन में 2024 में 9 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। आगरा विदेशी पर्यटकों के आगमन में 2024 में पहले स्थान पर रहा, जहाँ 14 लाख 65 हजार से अधिक विदेशी पर्यटक आए। बौद्ध पर्यटन की दृष्टि से कुशीनगर में 2024 में 2 लाख 51 हजार से अधिक विदेशी पर्यटक पहुँचे। इन स्थलों से होने वाली आय होटलों, ढाबों, रिक्शा चालकों, फूल-माला विक्रेताओं, गाइडों और हस्तशिल्प कारीगरों तक एक विस्तृत श्रृंखला में वितरित होती है, जिससे समाज के निचले तबके तक आर्थिक लाभ पहुँचता है।

2025 में प्रयागराज महाकुंभ ने तो वैश्विक स्तर पर उत्तर प्रदेश की पहचान को एक नया आयाम दे दिया। इस मेले में 55 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आए — यह संख्या किसी भी मानवीय सभा का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। एक अनुमान के अनुसार महाकुंभ से 3.50 लाख करोड़ रुपये की आर्थिक गतिविधि उत्पन्न हुई। होटल, टेंट सिटी, रेस्तराँ, यातायात, नाव परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प — हर क्षेत्र में अभूतपूर्व कारोबार हुआ। प्रयागराज की स्थानीय अर्थव्यवस्था में इस एकल आयोजन ने जो ऊर्जा भरी, वह अगले कई वर्षों तक उसे गतिशील रखेगी।

पर्यटन राजस्व की इस वृद्धि का आधार सिर्फ तीर्थाटन नहीं है। उत्तर प्रदेश सरकार ने पर्यटन को एक समग्र उद्योग के रूप में विकसित करने की ओर ध्यान दिया है। राज्य में तीन यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल — ताजमहल, फतेहपुर सीकरी और आगरा किला — पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकर्षण के केंद्र रहे हैं। इसके अलावा रामायण सर्किट, महाभारत सर्किट, बौद्ध सर्किट, जैन सर्किट, शक्तिपीठ सर्किट और सूफी-कबीर सर्किट जैसे विषयवार पर्यटन मार्गों को विकसित किया जा रहा है। इन सर्किट्स के माध्यम से पर्यटकों को एक गंतव्य से दूसरे गंतव्य तक सुविधाजनक यात्रा का अनुभव देने की कोशिश हो रही है, जिससे एक पर्यटक का औसत ठहराव बढ़े और प्रति पर्यटक खर्च में वृद्धि हो। वर्तमान में एक घरेलू पर्यटक औसतन 3,200 रुपये और एक विदेशी पर्यटक औसतन 12,000 रुपये प्रति यात्रा खर्च करता है। यदि इन औसतों में भी वृद्धि की जाए, तो राजस्व में और तेजी आ सकती है।

बुनियादी ढाँचे में हुए सुधारों की भूमिका भी इस कहानी में उतनी ही महत्वपूर्ण है। दिसंबर 2023 में अयोध्या अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन, कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का 2021 में परिचालन, नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण, यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं ने राज्य की कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव किया है। दिल्ली-मेरठ RRTS (रैपिडएक्स) का संचालन भी शुरू हो चुका है। इन संरचनाओं ने राज्य के भीतर और बाहर से पर्यटकों की पहुँच को सुगम बनाया है। उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक राष्ट्रीय राजमार्गों और रेल पटरियों वाला राज्य है, जो पर्यटन के लिए एक नैसर्गिक लाभ है।

हालाँकि इस तस्वीर का एक कठोर पहलू भी है, जिसे नज़रअंदाज़ करना उचित नहीं। उत्तर प्रदेश में प्रति लाख जनसंख्या पर होटलों में केवल 30 कमरे उपलब्ध हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत लगभग 180 कमरे प्रति लाख है। यह गहरी खाई दर्शाती है कि राज्य में आतिथ्य अवसंरचना अभी भी माँग के अनुरूप नहीं है। महाकुंभ और रामलला के दर्शन के लिए उमड़ी करोड़ों की भीड़ ने साफ दिखाया कि टेंट सिटी और अस्थायी व्यवस्थाओं के सहारे ही लाखों श्रद्धालुओं को ठहराया जा सका। यदि स्थायी होटल और रिसॉर्ट अवसंरचना में बड़े पैमाने पर निवेश नहीं हुआ, तो राजस्व की संभावनाओं का पूर्ण दोहन असंभव रहेगा। इस चुनौती को पहचानते हुए सरकार ने नए होटलों के निर्माण के नियमों को और अनुकूल बनाया है तथा हेरिटेज संपत्तियों को PPP मॉडल पर हेरिटेज होटलों, रेस्तराँ और वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है।

पर्यावरणीय स्थिरता भी एक गंभीर प्रश्न है। करोड़ों पर्यटकों के एक साथ आने से गंगा, सरयू और यमुना जैसी पवित्र नदियों पर दबाव बढ़ता है। धार्मिक स्थलों पर कचरे का बोझ, यातायात की भीड़ और स्थानीय जन-जीवन पर पड़ने वाला असर ऐसे मसले हैं, जिन पर गहन नीति-निर्माण की जरूरत है। उत्तर प्रदेश ने इस दिशा में UP-इकोटूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड की स्थापना की है और 234 गाँवों को ग्रामीण पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना बनाई है, जिसमें होमस्टे और ग्रामीण संस्कृति से जुड़ाव पर जोर दिया गया है। नवंबर 2025 में उत्तर प्रदेश पर्यटन ने AYUSH थेरेपी पर केंद्रित वेलनेस पर्यटन को बढ़ावा देने की नई पहल भी की है। ये कदम स्वागतयोग्य हैं, पर उनका क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर अभी प्रारंभिक दौर में है।

रोजगार सृजन की दृष्टि से पर्यटन का महत्व असाधारण है। विश्व यात्रा एवं पर्यटन परिषद (WTTC) के 2021 के आँकड़ों के अनुसार भारत पर्यटन और यात्रा क्षेत्र में रोजगार के मामले में वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर था। उत्तर प्रदेश देश का सर्वाधिक आबादी वाला राज्य है और यहाँ की विशाल युवा जनशक्ति को पर्यटन क्षेत्र रोजगार का एक सशक्त माध्यम बन सकता है। एक अनुमान के अनुसार अयोध्या में राम मंदिर से संबंधित पर्यटन गतिविधियों से 25,000 नई नौकरियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। 2024 की एक रिपोर्ट बताती है कि अगले पाँच से सात वर्षों में भारत में होटल-आतिथ्य क्षेत्र सभी नई नौकरियों का लगभग 10 प्रतिशत देगा, और इसमें उत्तर प्रदेश की बड़ी भूमिका होगी।

उत्तर प्रदेश का वर्तमान GSDP वित्त वर्ष 2025-26 में अनुमानित रूप से 30.80 लाख करोड़ रुपये (लगभग 359 अरब अमेरिकी डॉलर) है और राज्य देश की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। सरकार की महत्वाकांक्षा 2029 तक इसे एक ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 89 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने की है। इस लक्ष्य को हासिल करने में पर्यटन का योगदान केंद्रीय भूमिका में है। पर्यटन से होटल, परिवहन, खाद्य, हस्तशिल्प, निर्माण और डिजिटल सेवाओं जैसे अनेक क्षेत्रों में बहुगुणित आर्थिक प्रभाव पड़ता है। यदि प्रति पर्यटक औसत खर्च में मामूली वृद्धि भी हो और विदेशी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय इजाफा हो, तो यह क्षेत्र 2028 तक 70,000 करोड़ रुपये के राजस्व के लक्ष्य को आसानी से पार कर सकता है।

इस पूरे परिदृश्य को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश पर्यटन का यह उभार एक संरचनात्मक परिवर्तन है, न कि किसी एक घटना का अस्थायी उत्साह। अयोध्या में राम मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, महाकुंभ जैसे आयोजन, एक्सप्रेसवे और हवाई अड्डों का विस्तार तथा सरकार की सक्रिय नीतियाँ मिलकर एक ऐसा आधार बना रही हैं, जो दीर्घकालिक है। चुनौतियाँ भी हैं — अवसंरचना की कमी, पर्यावरणीय दबाव, प्रशिक्षित जनशक्ति का अभाव और छोटे शहरों में सुविधाओं की खराब गुणवत्ता। लेकिन यदि नीति-निर्माता इन चुनौतियों का सामना सतर्कता और दूरदृष्टि से करें, तो उत्तर प्रदेश का पर्यटन न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा, बल्कि करोड़ों आम लोगों — गाइड से लेकर गाड़ीवान तक, बुनकर से लेकर भोजनालय संचालक तक — के जीवन में भी एक वास्तविक और मापनीय बदलाव लाएगा। पर्यटन आधारित राजस्व की यह बढ़त उत्तर प्रदेश की नई आर्थिक पहचान की आधारशिला बन रही है।

— डॉ. शैलेश शुक्ला

डॉ. शैलेश शुक्ला

राजभाषा अधिकारी एनएमडीसी [भारत सरकार का एक उपक्रम] प्रशासनिक कार्यालय, डीआईओएम, दोणीमलै टाउनशिप जिला बेल्लारी - 583118 मो.-8759411563