कहानी

कहानी – संबल

खटपट की आवाज़ से नंदिता की नींद खुली। उठकर देखा तो माँ कावेरी आज तड़के ही उठ कर घर के काम में लगी हुई थी।
नंदिता चिढ़कर बोली “इतनी जल्दी क्यों उठ गईं माँ ?”
“अरी तू भी उठ जा।देख बहुत काम पड़े हैं।आज नानाजी आने वाले हैं।” कावेरी बोली
“अरे यार माँ मैं नहीं उठ रही।” कहकर नंदिता फिर सो गई।
पति अशोक ने चीख कर कहा “न ख़ुद सो रही हो न हमें सोने दे रही हो। तुम्हें नहीं सोना तो चुपचाप काम करो अपना और हमें सोने दो‌।”
इधर कावेरी घर की साफ-सफाई के साथ बचपन की यादों में खो गई कि कैसे कोई चीज़ चाहिए होती थी तो कावेरी पूरा घर सर उठा लेती थी।पापा की बहुत ही लाडली थी वह।जो वह कहती उसे हाज़िर मिलता।पिता कभी न नहीं कहते थे उसे। बेहद लाड़ प्यार में पली थी कावेरी।
देखते ही देखते 11 बज गया।
अब तक घर की साफ़-सफ़ाई के साथ नहा धो कर खाना भी बना चुकी थी वह।
नंदिता ने किचिन से आती खुशबू की तारीफ़ की और कहा ” क्या बात है माँ, खुशबू तो बड़ी अच्छी आ रही है। क्या क्या बनाया आज।”
“कढ़ी चावल, सूजी का हलवा, भिन्डी टमाटर की सूखी सब्ज़ी बन गई है। 12 बजे तक तुम्हारे नानाजी आयेंगे।तब गरम गरम पूरियां और भजिए पापड़ उतार लूंगी” कावेरी बोली।
अभी एक घंटा था पिताजी को आने में। कावेरी अपने बाल संवारने चली गई।
उधर पतिदेव भी नहाकर अखबार में लीन हो गए।
कावेरी की निगाह अपने सफ़ेद होते बालों पर गई।वह ठिठकी .. और झट से हेयर कलर ले कर अपने बाल कलर करने लगी।
अशोक का ध्यान गया। चिड़चिड़ा तो वह स्वभाव से ही था और इस तरह कावेरी को आइने में खुद को देखते और चिढ़ गया।
बोला “क्या है ये सब।रोज़ तो तुम सलवार कमीज़ या मैक्सी में रहती हो और आज सलीके से साड़ी पहन रक्खी है? मैं देख रहा हूँ इतनी देर से। आईने में ख़ुद को संवारने में लगी हो। और अब ये बाल काले .. ??
तुम भूल रही हो क्या कि तुम्हारे पापा आ रहे हैं.. ‌तुम्हारा प्रेमी नहीं।”
कावेरी ने अशोक की बात ऐसे सुनी जैसे वह बहरी हो और यथावत लगी रही।
नंदिता यह सब सुन रही थी। कलर किये हुए बालों को धो सुखा कर जूड़ा बांधे साड़ी का पल्लू कमर में कसे कावेरी कुछ सोच कर मुस्कुरा रही थी।
नंदिता की सवाल भरी नज़रों से नज़र टकराई।तब कावेरी ने बेटी को पास बैठाया और कहा “तुम तब समझोगी जब मेरी उम्र में आओगी। तुम नहीं जानती कि एक बेटी जब बड़ी होती है और पिता बूढ़ा। तब बेटी पिता की माँ बन जाती है।पिता आते हैं तो बेटी के भीतर वात्सल्य की धार दौड़ने लगती है।उसे लगता है वह कितना अच्छे से अच्छा और सेहतमंद भोजन पिता को खिला सके।
और जानती हो ये अपने आप को क्यूं संवार रही हूँ मैं?
इसलिए..कि बुजुर्ग पिता अपनी बेटी के सफ़ेद होते बालों को देखेगा तो वह अपने आप को और बूढ़ा समझने लगेगा‌। यदि बेटी निढाल दिखेगी तो पिता की उम्र उसी वक़्त कम हो जाएगी। इसलिए अपने आप को ठीक ठाक किया। ताकि मेरे पिता का संबल बढे। शायद ऐसा करके मैं अपने पिता की कुछ उम्र और उत्साह बढ़ा सकूं।”
पीछे खड़ा अशोक निस्तब्ध होकर सुन रहा था।
डोरबेल बजी।पापा आ गए थे।
घर में ख़ुशी का माहौल छा गया।
अब केवल कावेरी ही नहीं बल्कि नंदिता और अशोक भी आवभगत में लग गए। अशोक ने आज पूरे दिन की छुट्टी ले ली थी।
घर हँसी ठिठोली से भर गया
कावेरी के चेहरे पर सुकून की मुस्कान थी।

— प्रमिला ‘किरण’

प्रमिला 'किरण'

इटारसी, मध्य प्रदेश