कविता

प्यार है ईश्वर का  उपहार

प्यार की बन्द कर    जग में बाजार
प्यार नहीं है रे।  मूरख कोई व्यापार
प्यार है ईश्वर का   अनमोल उपहार
प्यार के काँधे पे टिका जीवन संसार

प्यार का मत लगा कोई कहीं दाम
प्यार है खुशियों का एक     पैगाम
प्यार दो दिलों का है मधुर अंजाम
प्यार से जिन्दगी है रंगीन गुलफाम

प्यार समर्पण का है पावन   नाम
प्यार में अपर्ण हो सुबह व   शाम
प्यार मोहब्बत में लिखी है पयाम
प्यार में जीवन का बृहत   आयाम

प्यार से जीवन है सबका   गुलजार
प्यार से बंधा है दो दिल की     तार
प्यार है लैला मजनू की    गले हार
प्यार से है बागों में मस्त       वयार

प्यार को मत कर जग में बदनाम
प्यार से सजा है जीवन की जहान
प्यार है चैन सुकुन का एक।  धाम
प्यार प्रेम मोहब्बत प्रीत की जुवान

— उदय किशोर साह

उदय किशोर साह

पत्रकार, दैनिक भास्कर जयपुर बाँका मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार मो.-9546115088

Leave a Reply