कविता

मौन

किस किस की सुनें,
हमारी सुनता है कौन
ध्यान रखें किस किसकी,
हम हो गए मौन

कांच से नाजुक थे सपने,
जो बने अफसाने
अब नींद भी नहीं आती,
कहां गयी न जाने

जब तक सपने थे,
जिंदा थी उम्मीदें
अंदर छाया अंधेरा
खोजता उजाला उनींदे

शून्य से चले थे,
शून्य तक है जाना
मध्य मद मोह है,
सब कुछ है बहाना

हमने रखी थी सदैव
एक बात का ध्यान
न फैलाया हाथ कभी
न मांगा कभी दान
आंखों की नमी छुपाकर,
होंठों पर हंसी लाकर
संग चलता रहा हर बार
सामने वाले पर छोड़ दिया
कितना समझा हमें हर बार

नदी बन गया हूं मैं
समेट कर सब चलना है
तली में ठहरा हुआ हूं
अनवरत जीवन संग बहना है

उम्र के इस पड़ाव पर जाना
अधूरा सा रह गया हूं मैं
अपनों के बीच होकर भी
कहीं खो गया हूं मैं

— श्याम सुंदर मोदी

श्याम सुन्दर मोदी

शिक्षा - विज्ञान स्नातक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से प्रबंधक के पद से अवकाश प्राप्त, जन्म तिथि - 03•05•1957, जन्म स्थल - मसनोडीह (कोडरमा जिला, झारखंड) वर्तमान निवास - गृह संख्या 509, शकुंत विहार, सुरेश नगर, हजारीबाग (झारखंड), दूरभाष संपर्क - 7739128243, 9431798905 कई लेख एवं कविताएँ बैंक की आंतरिक पत्रिकाओं एवं अन्य पत्रिकाओं में प्रकाशित। अपने आसपास जो यथार्थ दिखा, उसे ही भाव रुप में लेखनी से उतारने की कोशिश किया। एक उपन्यास 'कलंकिनी' छपने हेतु तैयार

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