धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ज्येष्ठ के बडे मंगलवार : भक्ति संस्कृति और श्रीराम – हनुमान के अटूट प्रेम का पर्व

श्री राम जानकी बैठे है मेरे सीने में, देख लो चाहे दिल के नगीने में.

यह पक्तियाँ केवल एक भजन नहीं है, । हनुमान बल्कि भगवान श्री हनुमान जी की अपने आराध्य प्रभु श्रीराम के प्रति असीम प्रेम, समर्पण और अक्ति का जीवंत स्वरूप है। जी के लिए श्रीराम केवल भगवान नही बल्कि उनके प्राण, उनका विश्वास और उनके जीवस का उद्देश्य उद्देश्य है। यही कारण है कि जब भी भक्ति, निष्ठा और सेवा का उदाहरण दिया जाता है, तब सबसे पहले श्रीहनुमान जी का स्मरण किया जाता है।
भगवान श्रीराम मर्यादा, धर्म और आदर्श जीवन के प्रतीक माने जाते हैं। उन्होंने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि सत्य और कर्तव्य के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति हर कठिनाई को पार कर सकता है। वही भगवान श्री हनुमान जी शक्ति, विनम्रता और निष्काम उन्होंने अपने जीवन स्वंय सेवा के प्रतीक है। उन्होंने को कभी महान नहीं माना बल्कि हमेशा अपने प्रभु श्रीराम के चरणो में समर्पित रहे । श्रीराम और हनुमान जी का सम्बंध केवल भगवान और भक्त का नहीं बल्कि विश्वास,प्रेमऔर आत्मिक जुड़ाव की सबसे सुंदर मिसाल है।
इसी अटूट भक्ति और श्रद्धा,का विशेष पर्व है ज्येष्ठ महीने के बडे मंगलवार, जिसे कई स्थानो पर बुड़वा मंगलवार भी कहा जाता है। उत्तर भारत में इस दिन का विशेष महत्व माना जाता है। भक्तजन श्रद्धालु हनुमान जी के मंदिरो में जाकर पूजा-अर्चना करते है, सुदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ करते है तथा व्रत रखकर अपने जीवन में सुख, शांति और साहस की कामना करते हैं। मान्यता है कि ज्येष्ठ मास की प्रचंड गर्मी में हनुमान जी अपने भक्तो की रक्षा करते है और उन्हे शक्ति, साहस तथा मानसिक शांति प्रदान करते हैं। इसलिए इस समय उनकी विशेष पूजा का महत्व बढ़ जाता है।

बडे मंगलवार से जुडी पौराणिक कथा

  1. हनुमान जी और राम जी का मिलन -मान्यताओं के अनुसार, अनुसार, त्रेतायुग मे ज्येष्ठ माह के मंगलवार के दिन ही भगवान श्रीराम और हनुमान जी की पहली मुलाकात हुई थी। यह मुलाकात किष्किंधा के पास ऋष्यमूक पर्वत के निकट हुई थी, जिसके बाद हनुमान जी आजीवन श्रीराम जी के सेवक बन गए ।

२. भीम का घमंड चूर करना (बुढ़वा मंगल) -एक कथा के अनुसार, महाभारत काल में

भीम को अपनी शक्ति पर बहुत अभिमान हो गया था । हनुमान जी ने उनका घमंड तोडने के लिए एक वृद्ध वानर का भेष धारण किया और रास्ते में अपनी पूंछ फैलाकर लेट गये। जब भीम ने उनसे पूंछ हटाने को कहा, तो उन्होंने कहा वे वृद्ध है और भीम ही पूंछ हटा दे। भीम अपनी पूरी शक्ति लगाकर भी पूंछ नहीं हिला सके, तब उन्हे समझ आया कि ये कोई साधारण वानर नहीं बल्कि हनुमान जी है। क्योंकि हनुमान जी ने वृद्ध भेष धारण किया था, इसलिए इसे ‘बुढ़वा मंगल’ कहा जाता है।

  1. ऐतिहासिक कथा : नवाब वाजिद अली शाह

लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में बड़ा मंगल मनाने के पीछे एक ऐतिहासिक कथा भी है। माना जाता है लगभग 400 वर्ष पहले अवध के नवाब वाजिद अली शाह के बेटे की तबियत बहुत खराब हो गयी थी। उनकी बेगम ने हनुमान जी की मन्नत मांगी और स्वस्थ होने पर हनुमान जी के नाम पर भंडारे आयोजित किये तब ही से लखनऊ में बड़ा मंगलवार बड़े उत्साह से मनाया जाता है |

हमारी संस्कृति से इसका सम्बंध:
बडे मंगलवार केवल धार्मिक अनुष्ठान नही है, बल्कि भारतीय संस्कृति में सेवा, दान और सामूहिक सद्भावना का संदेश भी । इस दिन जगह – जगह मीठा शरबत, पानी और भोजन के भंडारे लगाए जाते है, ताकि भीषण गर्मी में लोगो को राहत मिल सके । यह परंपरा हमे सिखाती है कि भक्ति भक्ति केवल मंदिरो तक सीमित नहीं होती, बल्कि दूसरो की सहायता करने में भी ईश्वर की सच्ची पूजा छिपी होती है।
यह पर्व समाज में एकता और प्रेम की भावना को भी मजबूत करता है। लोग जाति, वर्ग और भेदभाव से ऊपर उठकर एक-दूसरे की सेवा करते है, जो भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी सूब खूबसूरती है।

भक्ति, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक पहलू: हनुमान जी की भक्ति मनुष्य को आत्मविश्वास और मानसिक शक्ति देती है। जब कोई व्यक्ति तनाव या कठिनाइयों से घिरा होता है, तब हनुमान चालीसा, सुदरकांड और श्रीराम नाम का स्मरण उसके मन को शांति प्रदान करता है। मनोवैज्ञानिक रूप से भी भक्ति मनुष्य के भीतर सकारात्मक ऊर्जा जगाती है। सामूहिक पूजा, भजन और सेवा कार्य लोगो के बीच अपनापन, बढ़ाते है और अकेलेपन को कम करते हैं। बड़े मंगलवार हमे यह एहसास कराते है कि जीवन में केवल भौतिक सुख ही नहीं, बल्कि आत्मिक संतोष भी आवश्यक है। ज्येष्ठ के बड़े मंगलवार केवल एक धार्मिक परपंरा नहीं बल्कि श्रद्धा, सेवा, प्रेम और समर्पण का जीवंत उत्सव है। यह, पर्व हमे भगवान श्रीराम के आदर्शों और हनुमान जी की निष्काम भक्ति को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है।

” जहाँ श्रीराम का नाम है, वहाँ हनुमान जी का आशीवदि है और यहाँ सच्ची भक्ति है, वही जीवन का सबसे बडा सुख और सुकून है।”

— अवन्तिका सिंह

अवन्तिका सिंह

Psychology researcher Jabalpur, madhya pardesh

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