हास्य-व्यंग्य – प्रेमिका के खास सपने
आजकल की प्रेमिकायें प्रेमी को हड़काती हैं। प्रेमी के अंदर वीभत्स रस की उत्पत्ति होने लगती है। बहुत भयंकर डर का समावेश हो जाता है। बेचारा डरा हुआ होता है कि आज कितना खर्च करा देगी। कहीं दूसरे के घर में वह शशरीर वास न करने लगे। खाये मेरा, गुणगान करे मुरारीलाल का।
बार-बार मुरारीलाल का नाम लेकर डरावनी दृष्य पैदा कर देती है। आधुनिक प्रेमी निर्भय नहीं हो पा रहा है। प्रेमिका की बार-बार उलाहना से उसकी गर्दन झुक सी गयी है।कमर टेढ़ी हो गयी है। प्रेम के इस वीरान जंगल में बेचारा निहत्था हो जाता है। प्रेमिका के कटु शब्द वाह्यघाती हमला की तरह होता है।
प्रेमिका को प्रेमी एक सस्ते होटल में ले गया। प्रेमिका के सैकड़ों अरमानों पर पानी फिर गया। लाखों मिन्नते करने का बाद यही टूटा होटल। सस्ते में निपटाना चाहते है। मटको को देखो कि उसका प्रेमी कितना दिलदार है। उसके गूगल पे का पिन तक मटको जानती है। जी भर कर खाती है। महंगे-महंगे इडली,डोसा खाती है। बेचारी मटको कितनी खुश रहती है।
पूरी मार्केटिंग कर जाती है, जो मन में आया वो महंगी-महंगी चीजें खरीद लेती है। कितना भोला है मुरारीलाल। कितना खूबसूरत उसका मन है बेचारे का। सौंदर्य से परिपूर्ण उसकी आत्मा है। भगवान ऐसा नेक इंसान सबको दे। शायद मेरी किस्मत ही खराब है। मेरी पूजा-पाठ में कोई कमी नहीं रही। विधाता ही रूठा हुआ है। प्रत्येक सोमवार को व्रत रखी पर वही कंगला मिला।
यही दिन रहा तो मैं मुरारीलाल के प्रेम बंधन में बंध जाऊंगी। अपना दिन तो लौट आयेगा। मटको की तरह मैं भी मटक-मटक कर चलूंगी। मेरे भी सपनों में रौनक आ जायेगी। महंगी-महंगी साड़ियों का भंडार खरीद लूंगी। बढ़िया-बढ़िया कीमती जेवरात हो जायेंगे। अपनी दुनिया अलग होगी लेकिन इस कंगले से मुक्ति तो मिल जायेगी।
— जयचन्द प्रजापति ‘जय’
