बाल कविता

आजा भारत देश सजाएं

चलो प्रगति का क़दम बढ़ाएं,
आजा भारत देश सजाएं ।
माला की किरणे घेरे हैं ,
चलो लक्ष्य से प्रीत लगाएं।
आजा भारत देश सजाएं,
कलम बनी हैं ताक़त मेरी।
मंजिल पाने की कैसी देरी,
चलो लक्ष्य से प्रीत लगाएं।
आजा भारत देश सजाएं,
चलो ज्ञान का दीप जलाएं।
आजा भारत देश सजाएं,
सब मिलकर के हाथ बढ़ाएं

— आसिया फारूकी

*आसिया फ़ारूक़ी

राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका, प्रधानाध्यापिका, पी एस अस्ती, फतेहपुर उ.प्र

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