कविता

पिता

पिता
एक ताकत है
लू के थपेड़े हो
या आग का गोला
मुसीबतों में
ढाल की तरह होता है
बेटे के लिए
युध्द की तरह
जान की परवाह किये बिन
रौद्र रूप धारण कर सकता है पिता
पिता होता है तो
स्वर्ग की सैर होती है
पिता है तो
सारे खिलौने अपने होते हैं
सारे जहाँ में
अपना झंडा होता है

— जयचन्द प्रजापति ‘जय’

*जयचन्द प्रजापति

प्रयागराज मो.7880438226 jaychand4455@gmail.com

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