गीत/नवगीत

विदाई गीत

छोड़ गए हमको यहां, चले गए परदेश।
क्या तुमको आती नहीं, याद जरा भी शेष।।१.

सूना सूना सा लगे, तुम बिन ये घर-द्वार।
मधुबन सूना कर गए, बगियो के सरकार।।२.

कहती है बिछड़न, ये कैसी है दूरी,
कहीं फिर लिखेंगे, इबारत अधूरी।
१.
गुजर ही गए मेरे तन्हाई के दिन
गुजारे जो मैंने खुशी के वो पल छिन
समेटे हूं यादें सहेजी है पूरी,
कहीं फिर लिखेंगे इबारत अधूरी।
२.
करो एक वादा जो भूलो नहीं तुम
है तुम पर भरोसा की तोड़ो नहीं तुम
वो दिन रात बुनते हैं उम्मीद सारी,
कहीं फिर लिखेंगे इबारत अधूरी।
३.
समय के बवंडर से कोई निकाले
ये विचलित तरंगों को कोई संभाले
ये उलझन हिलाती है जीवन की धूरी
कहीं फिर लिखेंगे इबारत अधूरी।
४.
ये किस्मत के तूफां में कश्ती हमारी
है आहत परिंदा है घायल शिकारी
कि टूटे से दर्पण सी हालत है मेरी,
कहीं फिर लिखेंगे इबारत अधूरी।

कहती है बिछड़न ये कैसी है दूरी,
कहीं फिर लिखेंगे इबारत अधूरी।

— गजानंद डिगोनिया “जिज्ञासु”

गजानंद डिगोनिया 'जिज्ञासु'

पिता - श्री रामसिंह डिगोनिया माता - स्व. श्रीमती कृष्णा बाई डिगोनिया धर्म पत्नी - श्रीमती सीमा बाई डिगोनिया पुत्र - चि. शिवानंद, पुत्री - कु. सलोनी जन्म - 24 अक्टूबर सन् 1980 शिक्षा - बी. एड., स्नातकोत्तर हिन्दी, समाज शास्त्र सम्प्रति - राय साहब भंवर सिंह महाविद्यालय राला नसरुल्लागंज सहायक प्राध्यापक शिक्षा विभाग प्रमुख रचनाएं - अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हर जगह तू, अंतर्मन, भारत की तस्वीर, वंदे मातरम, बिटिया के बढ़ते कदम, मेरा बचपन, उमड़ कर बरसने को जी चाहता है, गर्मी को बुखार, बिकती लाशें, मैं एक शिक्षक हूं, यह धरा हमारी विरासत है। सम्मान - विश्व हिंदी रचनाकार मंच द्वारा "काव्यश्री सम्मान" 2022 कवि सम्मेलन प्रदेश के विभिन्न स्थानों में आयोजित कवि सम्मेलन में लगभग दर्जनभर कार्यक्रमों में काव्य पाठ किया, कविता पाठ में प्रधान विषय संवेदना। निवास - 4031 वार्ड नं. 15 मुन्ना कलोनी, शंकर विहार नीलकंठ रोड नसरुल्लागंज जिला सीहोर मध्य प्रदेश पिन 466331 संपर्क नंबर - 9977925408

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