विदाई गीत
छोड़ गए हमको यहां, चले गए परदेश।
क्या तुमको आती नहीं, याद जरा भी शेष।।१.
सूना सूना सा लगे, तुम बिन ये घर-द्वार।
मधुबन सूना कर गए, बगियो के सरकार।।२.
कहती है बिछड़न, ये कैसी है दूरी,
कहीं फिर लिखेंगे, इबारत अधूरी।
१.
गुजर ही गए मेरे तन्हाई के दिन
गुजारे जो मैंने खुशी के वो पल छिन
समेटे हूं यादें सहेजी है पूरी,
कहीं फिर लिखेंगे इबारत अधूरी।
२.
करो एक वादा जो भूलो नहीं तुम
है तुम पर भरोसा की तोड़ो नहीं तुम
वो दिन रात बुनते हैं उम्मीद सारी,
कहीं फिर लिखेंगे इबारत अधूरी।
३.
समय के बवंडर से कोई निकाले
ये विचलित तरंगों को कोई संभाले
ये उलझन हिलाती है जीवन की धूरी
कहीं फिर लिखेंगे इबारत अधूरी।
४.
ये किस्मत के तूफां में कश्ती हमारी
है आहत परिंदा है घायल शिकारी
कि टूटे से दर्पण सी हालत है मेरी,
कहीं फिर लिखेंगे इबारत अधूरी।
कहती है बिछड़न ये कैसी है दूरी,
कहीं फिर लिखेंगे इबारत अधूरी।
— गजानंद डिगोनिया “जिज्ञासु”
