शुभ हो सुभोर
कल तक मौन थी, आज महक रही है।
फूल ने समझाया जीवन में सबसे
सुंदर परिवर्तन शोर से नहीं,
धीरे-धीरे और चुपचाप होते हैं।
कल तक थी कली सिमटी-सिमटी,
अपने में खोई बेली,
मैंने देखा अपनी आँखों से,
उसका धीरे-धीरे खिलना,
जैसे मौन प्रार्थना का पल में
मधुर गीतों में बदलना।
— सविता सिंह मीरा
