कविता

शुभ हो सुभोर

कल तक मौन थी, आज महक रही है।
फूल ने समझाया जीवन में सबसे
सुंदर परिवर्तन शोर से नहीं,
धीरे-धीरे और चुपचाप होते हैं।

कल तक थी कली सिमटी-सिमटी,
अपने में खोई बेली,
मैंने देखा अपनी आँखों से,
उसका धीरे-धीरे खिलना,
जैसे मौन प्रार्थना का पल में
मधुर गीतों में बदलना।

— सविता सिंह मीरा

*सविता सिंह 'मीरा'

जन्म तिथि -23 सितंबर शिक्षा- स्नातकोत्तर साहित्यिक गतिविधियां - विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित व्यवसाय - निजी संस्थान में कार्यरत झारखंड जमशेदपुर संपर्क संख्या - 9430776517 ई - मेल - meerajsr2309@gmail.com

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