मन में हो सद्भावना
मन में हो सद्भावना, अच्छे सोच विचार।
बोले मधुर बोल से, रखता शिष्टाचार।।
मानव पावन सा लगे, सच में देव समान।
सदा भले की सोचता, मन में नहीं गुमान।
द्वेष कपट को छोड़ के, सबका हित सम जान।
औरों के संकट हरे, अपना कर बलिदान।
गैर नहीं उस के लिए, सब से करता प्यार।
मन में हो सद्भावना, अच्छे सोच विचार।
सब के दिल को जीत ले, चले पकड़ कर हाथ।
दुख सुख का साथी बने, सदा ही रहता साथ।
राह दिखाए नेक की, जाग्रत करे विवेक।
रहता है निर्भीक वह, रहे सत्य की टेक।
प्रेम भाव में बाॅंध के, रखता है संसार।
मन में हो सद्भावना, अच्छे सोच विचार।
भेद भाव से हो रहित, रखता मेल मिलाप।
वचन निभाता है सदा, सब से पहले आप।
वैर नहीं दुश्मन नहीं, लगते सब हैं मीत।
सब से मिल के प्रेम से, गाता मीठे गीत।
मैल नहीं भीतर रहे, भागे मन से खार।
मन में हो सद्भावना, अच्छे सोच विचार।
— शिव सन्याल
