वक़्त ही जवाब देता है
बात जब दिल से निकलती है,
बहुत दूर तलक जाती है।
जो जलते हैं मेरी शख़्सियत से,
उनके सीने में चुभ जाती है।
मेरे शब्दों पर जो हँसते हैं,
उन्हें वक़्त जवाब दे जाता है।
मेरी हर सच्ची बात का असर,
उन्हें उम्र भर सोचने पर मजबूर कर जाता है।
मैंने झूठ की महफ़िल में,
सच का दीप जलाया है।
हर ठोकर को सीढ़ी समझकर,
अपना रास्ता बनाया है।
लोगों ने रोका, टोकते रहे,
राहों में काँटे भी बिछाए।
लेकिन मेरे हौसलों के आगे,
हर तूफ़ान ने सिर झुकाए।
मैंने किसी का बुरा न चाहा,
फिर भी इल्ज़ाम बहुत मिले।
जो अपने होने का दावा करते थे,
वही सबसे पहले बदल गए।
मैंने शिकायतों का शोर नहीं,
ख़ामोशी का साहस चुना।
क्योंकि सच को प्रमाण नहीं,
केवल समय का साथ चाहिए।
मेरी कलम बिकती नहीं,
सत्य से कभी झुकती नहीं।
जो शब्द आत्मा से जन्म लेते हैं,
वे समय के साथ और निखरते हैं।
मैं शोहरत का भूखा नहीं,
न प्रशंसा का इंतज़ार है।
मेरे कर्म ही मेरी पहचान हैं,
यही मेरा सच्चा श्रृंगार है।
जो आज मेरी बातों पर हँसते हैं,
कल वही उन्हें दोहराएँगे।
जो आज मेरी राह रोकते हैं,
वक़्त उन्हें भी राह दिखाएगा।
मैं गिरा भी हूँ, संभला भी हूँ,
हर अनुभव ने मुझे गढ़ा है।
संघर्ष की अग्नि में तपकर ही,
जीवन ने स्वर्ण-सा रूप धरा है।
इसलिए न किसी से शिकायत है,
न किसी से कोई गिला।
मेरा विश्वास केवल इतना है –
सत्य का सूरज कभी नहीं ढलता।
बात जब दिल से निकलती है,
बहुत दूर तलक जाती है।
क्षणिक शोर भले ही गूँज उठे,
पर सत्य की प्रतिध्वनि अमर हो जाती है।
जो आज समझ नहीं पाते,
कल वही सिर झुकाएँगे।
जो आज उपहास करते हैं,
कल वही सम्मान जताएँगे।
क्योंकि समय के न्यायालय में
न पक्षपात होता है, न शोर।
वहाँ केवल कर्म बोलते हैं,
और सत्य का होता है गौरवपूर्ण भोर।
इसलिए मैं चलता रहूँगा,
सच की राह पर, निडर और अडिग।
क्योंकि मुझे विश्वास है –
झूठ चाहे कुछ पल चमक जाए,
पर सत्य का प्रकाश कभी मंद नहीं पड़ता।
अंततः…
न शब्द हारते हैं,
न सत्य झुकता है।
हर प्रश्न, हर आरोप, हर उपहास का –
एक ही उत्तर होता है…
वक़्त ही जवाब देता है।
— रूपेश कुमार
