कविता

काश हम कभी ना मिलते

हम कभी ना मिलते तो अच्छा होता,
तेरे चेहरे का जादू ना चला होता तो अच्छा होता।
ना तेरी झूठी मोहब्बत पर यक़ीन किया होता,
ना ख़्वाबों का महल यूँ ढहा होता तो अच्छा होता।

दिल का टूटना शायद मुक़द्दर की बात है,
हर प्रेम की अपनी एक सौगात होती है।
पर तुझसे इश्क़ ना किया होता अगर ज़िंदगी में,
तो दर्द का ये समंदर ना मिला होता तो अच्छा होता।

अब तेरी यादों से रिश्ता निभा रहे हैं हम,
अपने ज़ख्मों को मुस्कान में छुपा रहे हैं हम।
सोचते हैं अक्सर तन्हाई की लंबी रातों में,
तुझसे दिल ना लगाया होता तो अच्छा होता।

वक़्त ने सिखा दिया हर रिश्ते का फ़साना,
कौन अपना है और कौन है बेगाना।
जो मिला था कभी ख़ुशी बनकर मेरी राहों में,
वही ग़म बनकर ना मिला होता तो अच्छा होता।

आज भी तेरी यादें दिल को रुला जाती हैं,
बीते लम्हों की तस्वीरें सामने ला जाती हैं।
मगर अब यही दुआ निकलती है मेरे लबों से,
हम कभी ना मिलते ज़िंदगी में तो अच्छा होता॥

✍️ रूपेश कुमार

रूपेश कुमार

भौतिक विज्ञान छात्र एव युवा साहित्यकार जन्म - 10/05/1991 शिक्षा - स्नाकोतर भौतिकी , इसाई धर्म(डीपलोमा) , ए.डी.सी.ए (कम्युटर),बी.एड(फिजिकल साइंस) वर्तमान-प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी ! प्रकाशित पुस्तक ~ *"मेरी कलम रो रही है", "कैसें बताऊँ तुझे", "मेरा भी आसमान नीला होगा", "मैं सड़क का खिलाड़ी हूँ" *(एकल संग्रह) एव अनेकों साझा संग्रह, एक अंग्रेजी मे ! विभिन्न राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओ मे सैकड़ो से अधिक कविता,कहानी,गजल प्रकाशित ! राष्ट्रीय साहित्यिक संस्थानों से सैकड़ो से अधिक सम्मान प्राप्त ! सदस्य ~ भारतीय ज्ञानपीठ (आजीवन सदस्य) पता ~ ग्राम ~ चैनपुर  पोस्ट -चैनपुर, जिला - सीवान  पिन - 841203 (बिहार) What apps ~ 9934963293 E-mail - - rupeshkumar01991@gmail.com

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