नन्हे हाथ का विश्वास
नन्हे हाथ जब थाम लें,
मिलता जग का मान।
पापा संग हर मोड़ पर,
खिल उठता अरमान॥
अँगुली पकड़ चलना सीख,
सपनों को दे पंख।
ममता, हिम्मत, मुस्कान से,
महके जीवन-अंक॥
नन्ही आँखों में बसी,
उत्सुकता की धार।
हर पल सीखें देख कर,
दुनिया का व्यवहार॥
पापा की मुस्कान से,
मिट जाए हर डर।
छोटे-छोटे हौसलों से,
जीते ऊँचा घर॥
अँगूठा ऊपर कर कहे,
“सब होगा आसान।”
नन्हे मन का यह भरोसा,
सबसे बड़ी पहचान॥
बचपन के ये अनमोल क्षण,
रखना सदा सँभाल।
कल यही यादें बनेंगी,
जीवन का मधुमाल॥
बचपन सबसे कीमती,
प्रेम अनोखा धन।
पापा-बेटे का स्नेह ही,
जीवन का स्पंदन॥
— डॉ. सत्यवान सौरभ
