कविता

बारिश की बूँदें

बारिश की बूँदें जब धरती पर गिरती हैं,
लगता है मानो खुशियाँ ही बिखरती हैं।
ऐसा प्रतीत होता है हर पल जैसे,
आकाश और धरती का मिलन हो रहा हो वैसे।
बारिश की बूँदों में जब मैं भीग जाती हूँ,
प्रिय की यादों में खोकर मुस्कुराती हूँ।
हर बूँद मुझे उनका एहसास दिलाती है,
दिल की धड़कनों को और बढ़ाती है।
बरसती फुहारें जैसे मुझसे कहती हैं,
जीवन की हर पीड़ा अब यहीं बहती है।
आज अपने सारे ग़म इस बारिश में धो लो,
दिल के हर दर्द को खुलकर संजो लो।
अपने प्रिय की बाँहों में सिमट जाओ,
प्रेम की बारिश में स्वयं को भिगो जाओ।
यह सावन हर दिल को यही संदेश सुनाए,
प्रेम से भरा जीवन हर पल मुस्काए।

— गरिमा लखनवी

गरिमा लखनवी

दयानंद कन्या इंटर कालेज महानगर लखनऊ में कंप्यूटर शिक्षक शौक कवितायेँ और लेख लिखना मोबाइल नो. 9889989384

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