गीत/नवगीत

हे प्रभु, तेरा हर पल शुकराना

हर पल का शुकराना,हर साँस का शुकराना
तेरी दी हर धड़कन,हर आस का शुकराना।
सूनी राहों में भी तूने उजियारा भर डाला
हे मेरे प्रभु, तेरे हर एहसास का शुकराना।

गिरने से पहले तूने मेरा हाथ थाम लिया
भटके हुए कदमों को अपना नाम दिया।
बेगानों की दुनियाँ में भी अपना बना लिया,
तेरी हर रहमत, हर करम का शुकराना किया।

अंग-संग रहकर तूने हर डर को दूर किया
आँधियों के बीच भी जीवन को नूर किया।
हर दुःख की धूप में दया की छाँव बिछा दी
तेरी हर मेहरबानी का दिल से शुकराना किया।

जब-जब सिर पर तेरी रहमत का हाथ आया,
टूटा हुआ विश्वास भी फिर से मुस्कुराया।
आँसू भी इबादत बने,सजदे भी मुस्काए
तेरे हर फ़ैसले को मैंने दिल से अपनाया।

न धन का शुकराना,न शोहरत का अफ़साना
बस तेरी रज़ा में ही है मेरा ठिकाना।
किशन,आख़िरी साँस तक बस इतनी सी दुआ रहे,
हे प्रभु, तेरा हर पल..हर साँस..हर जन्म शुकराना।

— किशन सनमुखदास भावनानी

*किशन भावनानी

कर विशेषज्ञ एड., गोंदिया

Leave a Reply