भजन/भावगीत

गीत – चरणों शीश झुकाता

प्रथम पूज्य की करे अर्चना, रिद्धि-सिद्धि के है दाता ।
दयावंत हे बुद्धि प्रदायक, जन-जन के भाग्य विधाता ।।

प्रथम पूज्य को प्रथम निमंत्रण, नत मस्तक हम आराधे ।
होते सबके काम सफल जब, गणपति आकर सब साधे ।।
रिद्धि-सिद्धी के संग पधारो, शुभ कर्ता सुख के स्वामी ।
शास्त्र रचेता गणपति बप्पा, वेद-शास्त्र के है ज्ञाता ।।

दुख-हर्ता सुख-कर्ता स्वामी, सबका मङ्गल करते हो ।
शम्भू सुत गौरी के नंदन, कष्ट सभी के हरते हो ।।
शूप-कर्ण रक्षार्थ उठाओ, दुख में अब जनता सारी ।
धर्म-धरा पर संकट छाया, धर्म विरोधी हड़काता ।।

गणपति काज सुधारो सबके जीव जगत हो आभारी ।
करे अर्चना पूज्य तुम्हारी, आस-तुम्ही से है भारी ।।
दूर करो सब कष्ट जगत के, हे जग के अंतर्यामी ।
हे प्रथमेश्वर बुद्धि विनायक, मैं चरणों शीश झुकाता ।।

— लक्ष्मण लड़ीवाला ‘रामानुज’

लक्ष्मण रामानुज लड़ीवाला

जयपुर में 19 -11-1945 जन्म, एम् कॉम, DCWA, कंपनी सचिव (inter) तक शिक्षा अग्रगामी (मासिक),का सह-सम्पादक (1975 से 1978), निराला समाज (त्रैमासिक) 1978 से 1990 तक बाबूजी का भारत मित्र, नव्या, अखंड भारत(त्रैमासिक), साहित्य रागिनी, राजस्थान पत्रिका (दैनिक) आदि पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित, ओपन बुक्स ऑन लाइन, कविता लोक, आदि वेब मंचों द्वारा सामानित साहत्य - दोहे, कुण्डलिया छंद, गीत, कविताए, कहानिया और लघु कथाओं का अनवरत लेखन email- lpladiwala@gmail.com पता - कृष्णा साकेत, 165, गंगोत्री नगर, गोपालपूरा, टोंक रोड, जयपुर -302018 (राजस्थान)

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