हिंदी
हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा है, और संस्कृति की थाती है,
संस्कृत की छोटी बहना है, जन जन को यह भाती है|
जैसा लिखा वही है पढ़ना, जो बोलो वैसा ही लिखना,
नहीं शांत इसमें अक्षर हैं, लिपी देवनागरी कहलाती है|
— मदन मोहन सक्सेना
हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा है, और संस्कृति की थाती है,
संस्कृत की छोटी बहना है, जन जन को यह भाती है|
जैसा लिखा वही है पढ़ना, जो बोलो वैसा ही लिखना,
नहीं शांत इसमें अक्षर हैं, लिपी देवनागरी कहलाती है|
— मदन मोहन सक्सेना