कविता

तोते में बंद जान

गद्दी पर जो बैठा है,वो केवल एक मुखौटा है,
असली खेल तो कहीं दूर,उस तोते ने ही ओटा है,
किस्सों का जादूगर देखो,आज धरा पर आया है,
लोकतंत्र के पावन घर में,मायाजाल बिछाया है,
जनता बटन दबाती रह गई,भाग्य कहीं और जागा है,
जो दिखता है वो सच नहीं है,खींचा कोई धागा है,
मशीन की उन चिप्स के पीछे,छिपकर बैठा पहरेदार,
लाखों-करोड़ों हाथों का,छीन रहा जो अधिकार,
अब तोड़ना होगा उस पिंजरे को,जो परदे के पीछे है,
नियम और क़ानून का पहिया,जिसके कारण नीचे है,
कागज़ के उस मतपत्र में ही,असली जनता की शान है,
क्योंकि इस नए जादूगर की,ईवीएम में ही जान है,
देख रही है ‘जेन-जी’ पीढ़ी,यह कैसा अंधियारा है,
जिसने अपने अधिकारों का,हर एक तिनका हारा है,
डिग्री लेकर सड़कों पर है,आँखों में धुंधला ख़्वाब लिए,
भटक रहा है युवा देश का,मन में सौ-सौ सवाल लिए,
मुक्ति दिलानी होगी उनको,इस छलावे के जाल से,
उन्हें बचाना होगा हमको,इस भविष्य के काल से,
कलम उठेगी,आवाज़ उठेगी,अब तो यह ऐलान है,
तोते से अब प्राण छीनना,इस पीढ़ी का अरमान है,
बदलेगा इतिहास यही,जब जागेगा इंडिया महान है।

— राजेन्द्र लाहिरी

राजेन्द्र लाहिरी

पामगढ़, जिला जांजगीर चाम्पा, छ. ग.495554

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